Radhika Rani Ji

राधिका रानी जी - Radhika Rani Ji
Bhajans

राधिका रानी जी - Radhika Rani Ji

यह भजन श्री राधिका रानी के चरणों में पूर्ण समर्पण और बृज-रज की उपासना की भावना को व्यक्त करता है। इसमें भक्त की यही अभिलाषा है कि उसे बृजवासियों की संगति मिले, यमुना-तट, कुंज-गलियाँ, गोवर्धन और श्री राधा-कृष्ण के दिव्य दर्शन सदा प्राप्त होते रहें। यह भजन वैष्णव भक्ति परंपरा में राधा-प्रधान माधुर्य भाव को अत्यंत कोमल रूप में प्रकट करता है। भावार्थ (संक्षेप) इस भजन का मूल भाव यह है कि भक्त संसार के सभी आकर्षण त्यागकर केवल श्री राधा रानी की शरण में रहना चाहता है। बृज की रज, संतों की संगति, यमुना-स्नान और श्री राधा-कृष्ण की लीलाओं में लीन होना ही उसके जीवन का लक्ष्य है। भक्त राधिका को करुणामयी, कृष्ण-मनुहारिणी और बृज की अधिष्ठात्री मानकर उनसे दास्य-भाव से कृपा की याचना करता है।