Radha Raman Sab Cheeni

राधा रमण सब छीनी रे मोरा नैना मिलाइ के- Radha Raman Sab Cheeni
Bhajans

राधा रमण सब छीनी रे मोरा नैना मिलाइ के- Radha Raman Sab Cheeni

परिचय यह अत्यंत मधुर, प्रेमरस से परिपूर्ण और सूफी-भक्ति भाव से ओतप्रोत भजन भक्त और भगवान के दिव्य मिलन की अनुभूति को प्रकट करता है। इस भजन में भक्त श्रीश्याम के प्रेम में पूरी तरह डूब जाने की अवस्था का वर्णन करता है, जहाँ प्रभु की एक प्रेमभरी दृष्टि ही उसके जीवन को बदल देती है। “छाप तिलक” यहाँ अहंकार, पहचान और सांसारिक बंधनों का प्रतीक है, जिसे प्रभु अपने प्रेम से हर लेते हैं। भजन में प्रेम, भक्ति, समर्पण और आत्मिक मिलन की अद्भुत झलक देखने को मिलती है। इसके शब्द इतने भावपूर्ण हैं कि सुनने वाला स्वयं को प्रभु प्रेम में डूबा हुआ अनुभव करता है। भावार्थ इस भजन में भक्त कहता है कि जब से उसकी आँखें प्रभु श्याम से मिली हैं, तब से उसका पूरा जीवन बदल गया है। प्रभु की प्रेममयी दृष्टि ने उसकी पहचान, अहंकार और सांसारिक मोह सब कुछ छीन लिया है। भक्त कहता है कि श्रीश्याम ने उसे अपने प्रेम के रंग में ऐसा रंग दिया कि अब वह पूरी तरह उन्हीं का हो गया है। प्रेम और भक्ति का अमृत पिलाकर प्रभु ने उसे प्रेममग्न और मतवाला बना दिया है। आगे भक्त अपने आप को प्रभु की दासी और सुहागन मानते हुए कहता है कि श्याम नाम की मेहंदी ने उसके जीवन को पवित्र और सफल बना दिया है। यह भजन आत्मा और परमात्मा के प्रेमपूर्ण मिलन का अत्यंत सुंदर और भावुक चित्रण करता है।