नैनन में ही राखूँ पिया तोहे - Nainan Mein hi Rakhu Piya Tohe
परिचय
यह अत्यंत मधुर और प्रेममयी कृष्ण भजन भक्त और भगवान श्रीकृष्ण के गहरे आत्मिक प्रेम का सुंदर चित्रण करता है। इस भजन में भक्त अपने प्रियतम श्रीकृष्ण को अपने नयनों में बसाकर रखने की इच्छा व्यक्त करता है। उसके लिए संसार का प्रत्येक सुख और वैभव प्रभु की एक झलक के सामने तुच्छ प्रतीत होता है।
भजन में भक्त की प्रेममयी भावना अत्यंत सरल और गहन रूप में प्रकट होती है। वह चाहता है कि श्रीकृष्ण की सांवली छवि सदैव उसकी आँखों और हृदय में बनी रहे। उनके अधरों की मधुरता, उनके रूप की मोहकता और उनके प्रेम का रस भक्त के जीवन का आधार बन जाता है।
यह भजन माधुर्य भक्ति का सुंदर उदाहरण है, जिसमें भक्त अपने आराध्य के प्रेम में पूर्ण रूप से डूब जाता है और संसार से विरक्त होकर केवल प्रभु के सान्निध्य की कामना करता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता है कि वह उन्हें अपने नयनों में सदा के लिए बसाकर रखना चाहता है। प्रभु की एक झलक ही उसके लिए पूरे संसार के सुखों से बढ़कर है।
भक्त कहता है कि वह श्रीकृष्ण के सांवले स्वरूप और उनके अधरों के अमृतमय रस का अनुभव करना चाहता है। उनके प्रेम में डूबकर उसे किसी अन्य विषय में रुचि नहीं रह जाती।
अंत में भक्त यह व्यक्त करता है कि प्रभु और भक्त के मधुर मिलन की अनुभूति इतनी गहरी और दिव्य है कि उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यही इस भजन का मुख्य भाव है।