मैं बैरागन - Mai Bairagan
परिचय
यह भजन श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण वैराग्य और समर्पण की भावना को प्रकट करता है। इसमें एक भक्त या गोपी यह कहती है कि वह संसार के सभी बंधनों को छोड़कर केवल अपने साँवरे श्रीकृष्ण के प्रेम में डूब जाना चाहती है और उसी रूप में रहना चाहती है जिससे उसके प्रिय भगवान प्रसन्न हों।
भावार्थ
भजन का भाव यह है कि जब किसी भक्त का हृदय भगवान के प्रेम में डूब जाता है, तब संसार के रिश्ते और आकर्षण महत्वहीन लगने लगते हैं। भक्त केवल वही जीवन जीना चाहता है जिससे भगवान प्रसन्न हों। वह अपने वस्त्र, रूप और जीवन को भी प्रभु की इच्छा के अनुसार बदलने को तैयार रहता है। यह भजन भक्ति, प्रेम और वैराग्य की गहरी भावना को दर्शाता है।