कोई जाए जो वृन्दावन - Koi Jaye Jo Vrindavan
परिचय
यह अत्यंत भावपूर्ण कृष्ण भजन एक भक्त की अपने आराध्य श्रीकृष्ण के प्रति गहरी विरह भावना और समर्पण को व्यक्त करता है। भजन में भक्त स्वयं वृन्दावन न जा पाने की विवशता प्रकट करते हुए किसी यात्री के माध्यम से अपना संदेश, प्रणाम और प्रेम श्रीकृष्ण तक पहुँचाने की विनती करता है। इसके शब्दों में भक्ति, प्रेम, विरह और श्रीधाम वृन्दावन के प्रति अनन्य आकर्षण का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त भगवान श्रीकृष्ण से मिलन की तीव्र अभिलाषा व्यक्त करता है। वह कहता है कि यदि कोई वृन्दावन जाए तो उसके प्रणाम, आँसू, भावनाएँ और प्रेम प्रभु तक पहुँचा दे। भक्त स्वयं को संसार की माया और कठिनाइयों में फँसा हुआ मानकर श्रीकृष्ण से अपने उद्धार की प्रार्थना करता है।
भजन का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा भक्त अपने प्रभु से दूर रहकर भी हर क्षण उनका स्मरण करता है और जीवन के अंतिम क्षण तक उनके चरणों में स्थान पाने की कामना करता है। यह रचना श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण, प्रेम और विरह-भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।