कन्हिया तुम्हि एक नजर देखना है। - Kanhaiya Tumhe Ek Nazar Dekhna Hai
परिचय
यह अत्यंत भावपूर्ण और करुणा से भरा कृष्ण भजन भक्त और भगवान के बीच की गहरी आत्मिक पुकार को व्यक्त करता है। भजन में भक्त श्रीकृष्ण से केवल एक कृपा भरी दृष्टि की याचना करता है। वह प्रभु को याद दिलाता है कि आपने सदा अपने भक्तों — चाहे वे विदुर हों, भीलनी हों, गजेंद्र हों या जटायु — सब पर समान कृपा बरसाई है, इसलिए अब अपने इस दास पर भी कृपा दृष्टि करें।
भजन के शब्दों में विरह, प्रेम, विनम्रता और पूर्ण समर्पण का अद्भुत संगम दिखाई देता है। भक्त अपने आँसुओं और हृदय की वेदना के माध्यम से भगवान को पुकारता है और चाहता है कि प्रभु उसकी भक्ति और प्रेम की सच्चाई को पहचानें। यह भजन सुनने वाले के हृदय में भक्ति, करुणा और प्रभु मिलन की तीव्र भावना जागृत कर देता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त भगवान श्रीकृष्ण से विनती करता है कि वे उस पर एक कृपा भरी दृष्टि डालें। भक्त कहता है कि जिस प्रकार प्रभु ने अपने अन्य भक्तों के घर जाकर उन्हें अपनाया, उसी प्रकार उसके जीवन और घर को भी अपनी उपस्थिति से पवित्र करें।
भजन में गजेंद्र और जटायु जैसे भक्तों का स्मरण करते हुए यह बताया गया है कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और संकट के समय उन्हें सहारा देते हैं। भक्त उन्हीं कृपालु हाथों की शक्ति और करुणा को अपने जीवन में अनुभव करना चाहता है।
अंत में भक्त अपने आँसुओं और प्रेम भरी पुकार के माध्यम से भगवान से कहता है कि यदि वे सच में दुखियों की आह सुनते हैं, तो उसकी भक्ति और वेदना का प्रभाव भी अवश्य स्वीकार करें। यह भजन सच्ची भक्ति, विनम्रता और प्रभु कृपा की आशा का अत्यंत सुंदर उदाहरण है।