जय जय सुरनायक जन सुखदायक - Jai Jai Surnayak Jan Sukhdayak Prantpal Bhagvant
परिचय
यह दिव्य स्तुति भगवान श्रीहरि (श्रीविष्णु/नारायण) के सर्वव्यापक, करुणामय और निर्गुण स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करती है। इसमें प्रभु को सुरों के नायक, भक्तों के रक्षक और संसार के पालनकर्ता रूप में नमन किया गया है।
भावार्थ
भगवान समस्त देवताओं के स्वामी, भक्तों के दुःख हरने वाले और दीनों पर सहज कृपा करने वाले हैं। वे सृष्टि के रचयिता होते हुए भी माया से परे हैं। ऋषि, मुनि, सिद्ध और देवता निरंतर उनका ध्यान और गुणगान करते हैं। जो मन, वचन और कर्म से उनकी शरण में जाता है, उसके सभी भय और विपत्तियाँ नष्ट हो जाती हैं।
पाठ का फल
इस स्तुति का नित्य श्रद्धा से पाठ करने पर—
भय, शोक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं
ईश्वर में अटूट भक्ति जागृत होती है
जीवन की चिंताएँ शांत होती हैं
आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है
भवसागर से पार होने की कृपा मिलती है