Hey Murlidhar

हे मुरलीधर - Hey Murlidhar
Bhajans

हे मुरलीधर - Hey Murlidhar

परिचय यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति एक भक्त की गहरी पीड़ा, विनम्रता और समर्पण का भावपूर्ण चित्रण करता है। इसमें भक्त अपने जीवन के संघर्षों और दुखों से व्यथित होकर मुरलीधर के द्वार पर आने की इच्छा व्यक्त करता है। वह प्रभु को मनमोहन, गिरधारी और बनवारी जैसे प्रेममय नामों से पुकारते हुए उनकी करुणा और कृपा की आशा करता है। भजन में भक्त की आस्था और भगवान के प्रति अटूट विश्वास स्पष्ट रूप से झलकता है। भावार्थ इस भजन में भक्त यह स्वीकार करता है कि वह संसार की कठिनाइयों से हार चुका है और अब केवल प्रभु की शरण में ही उसे आशा दिखाई देती है। वह मानता है कि भगवान अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं, इसलिए वह भी अपनी व्यथा उन्हें सुनाना चाहता है। वह प्रभु से करुणा की याचना करता है और कहता है कि उनके बिना उसका कोई सहारा नहीं है। भजन यह संदेश देता है कि सच्चे मन से किया गया समर्पण और विश्वास भगवान को अवश्य ही प्रसन्न करता है, और वे अपने भक्त को कभी निराश नहीं करते।
हे मुरलीधर छलिया मोहन - Hey Murlidhar Chhaliya Mohan
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हे मुरलीधर छलिया मोहन - Hey Murlidhar Chhaliya Mohan

परिचय यह मधुर भक्ति पद भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और विरह भाव को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने हृदय की स्थिति का वर्णन करता है कि वह श्रीकृष्ण के रूप, गुण और लीलाओं से इतना आकर्षित हो गया है कि अनजाने में ही अपना हृदय उन्हें समर्पित कर बैठा। भावार्थ इस पद में भक्त कहता है कि पहले से ही जीवन में अनेक दुःख थे, किंतु जब से उसने श्रीकृष्ण से प्रेम किया है तब से यह विरह और बढ़ गया है। हृदय कहता है कि प्रभु अत्यंत सुंदर हैं और आँखें उन्हें देखने के लिए व्याकुल हैं, परंतु वे सामने नहीं आते। भक्त उनकी महिमा सुनकर आश्चर्यचकित है और उनसे मिलने की इच्छा रखता है। अंत में वह कहता है कि प्रभु ही राम हैं, वही घनश्याम हैं और वही योगेश्वर हैं। वे कभी धनुष धारण करते हैं तो कभी मुरली बजाते हुए यमुना तट पर अपने भक्तों के बीच विराजमान रहते हैं।