Gopal Gokul Vallabhi

गोपाल गोकुल वल्लभी - Gopal Gokul Vallabhi
Bhajans

गोपाल गोकुल वल्लभी - Gopal Gokul Vallabhi

परिचय यह अत्यंत दिव्य और संस्कृतनिष्ठ श्रीकृष्ण स्तुति भगवान श्रीगोपाल की सुंदरतम छवि और उनकी करुणामयी लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करती है। इस स्तुति में श्रीकृष्ण को गोकुल के प्रिय पालनहार, गोपों और गौओं के रक्षक तथा समस्त भक्तों के जीवनाधार के रूप में स्मरण किया गया है। भजन में श्रीकृष्ण के श्याम सुंदर स्वरूप, पीताम्बर, मोरपंख, कुण्डल और कमल समान नेत्रों का अत्यंत मनोहारी वर्णन है। उनकी किशोर छवि और मधुर मुस्कान भक्त के हृदय को प्रेम और आनंद से भर देती है। यह स्तुति भक्त को भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमलों की भक्ति और शरणागति का संदेश देती है। तुलसीदास जी द्वारा वर्णित यह भाव भक्त और भगवान के मधुर संबंध तथा भक्ति की गहराई को प्रकट करता है। भावार्थ इस स्तुति में भक्त भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमलों का ध्यान और भजन करता है, जो देवताओं और ऋषि-मुनियों के लिए भी दुर्लभ हैं। श्रीकृष्ण की घनश्याम छवि, उनकी सुंदर किशोर मूर्ति और करुणामयी स्वभाव संसार को आनंद प्रदान करते हैं। भक्त श्रीकृष्ण के मोर मुकुट, कुण्डल और कमल समान नेत्रों की शोभा का वर्णन करते हुए कहता है कि उनके दर्शन से संसार के भय और दुख दूर हो जाते हैं। अंत में भक्त यह स्वीकार करता है कि वृन्दावन बिहारी श्रीकृष्ण ही उसके समस्त भय और कष्टों को हरने वाले हैं। इसलिए वह उनके चरणों की शरण ग्रहण करता है और उनका निरंतर स्मरण करता है।