बुलावा ग्यारस का - Bulawa Gyaras Ka
परिचय
यह अत्यंत मार्मिक और प्रेमभरा भजन खाटू श्याम बाबा के प्रति भक्त की गहरी तड़प और विरह भावना को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने प्रिय श्याम से विनती करता है कि ग्यारस के पावन अवसर पर उसे खाटू धाम अवश्य बुलाएं, क्योंकि वह प्रभु के बिना रह नहीं सकता। यह भजन उस भाव को दर्शाता है जहां भक्त केवल भगवान के दर्शन और उनके सान्निध्य को ही अपने जीवन का सबसे बड़ा सुख मानता है। इसमें श्याम बाबा के प्रति अटूट प्रेम, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का सुंदर चित्रण किया गया है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त कहता है कि खाटू धाम जाकर श्याम बाबा के दर्शन करना उसके जीवन की सबसे बड़ी अभिलाषा है। वह स्वयं को दुर्भाग्यशाली मानता है यदि उसे प्रभु के दर्शन का अवसर न मिले। संसार चाहे हंसता और आनंद मनाता रहे, लेकिन भगवान से दूर रहकर उसका मन केवल विरह और पीड़ा अनुभव करता है।
भजन यह भी दर्शाता है कि भक्त अपने प्रभु को दयालु और करुणामयी मानता है। वह कहता है कि यदि उससे कोई गलती हुई भी हो, तो भी श्याम उसे अपने प्रेम से दूर नहीं करेंगे। अंत में भक्त पूर्ण विश्वास के साथ कहता है कि उसका श्याम उसे कभी निराश नहीं करेगा और स्वयं उसे अपने धाम बुलाने आएगा। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के गहरे प्रेम, भरोसे और आत्मीय संबंध को अत्यंत भावुकता से प्रस्तुत करता है।