ब्रज के नँदलाला - Brij ke Nandlala
परिचय
यह अत्यंत मधुर और भक्तिरस से भरा श्रीकृष्ण भजन भगवान के नाम की महिमा और उनकी कृपा का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण को “बृज के नंदलाला” और “राधा के सांवरिया” कहकर प्रेमपूर्वक स्मरण करता है और अनुभव करता है कि प्रभु का नाम लेने मात्र से जीवन के सभी दुःख दूर हो जाते हैं।
भजन में मीरा बाई की अटूट भक्ति, गोवर्धन पर्वत की लीला और श्रीकृष्ण की मधुर मुरली का मनोहारी चित्रण किया गया है। भक्त यह विश्वास प्रकट करता है कि जिस पर भगवान की कृपा हो जाए, उसे संसार की कोई भी विपत्ति नहीं डिगा सकती।
यह भजन केवल भगवान की स्तुति नहीं बल्कि उनके नाम में छिपी शक्ति, प्रेम और आनंद की अनुभूति का दिव्य वर्णन है। श्रीकृष्ण का स्मरण भक्त के मन को शांति, प्रेम और भक्ति से भर देता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त कहता है कि भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेने से जीवन के सभी दुःख दूर हो जाते हैं। मीरा बाई के उदाहरण से यह बताया गया है कि सच्चे भक्त की रक्षा भगवान स्वयं करते हैं और विष को भी अमृत बना देते हैं।
गोवर्धन लीला के माध्यम से भजन यह दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों पर आने वाली हर विपत्ति को सहज ही दूर कर देते हैं। उनके एक संकेत से बड़े से बड़ा संकट समाप्त हो सकता है।
भजन के अंतिम भाग में भक्त कहता है कि जब श्रीकृष्ण मन और नेत्रों में बस जाते हैं, तब जीवन आनंदमय हो जाता है। उनकी मुरली की मधुर धुन मन के भीतर प्रेम और भक्ति का रास रचा देती है। यही भगवान के नाम और स्मरण की सबसे बड़ी महिमा है।