श्री भैरव ताण्डव स्तोत्रम्- Shree Bhairav Tandav Stotram
परिचय
श्री भैरव स्तोत्रम् भगवान शिव के उग्र एवं रक्षक स्वरूप कालभैरव की स्तुति है। भैरव जी को काशी का कोतवाल कहा जाता है और वे भय, कष्ट, रोग, बाधा तथा नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाले माने जाते हैं।
इस स्तोत्र में भैरव भगवान के
उग्र तेज
नृत्यशील रूप
करुणा
भक्तवत्सलता
का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया गया है।
नियमित श्रद्धा से पाठ करने पर साधक को भयमुक्ति, आत्मबल, सुरक्षा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
स्तोत्र का भाव
यह स्तोत्र भगवान भैरव को बार-बार “भज भज” कहकर स्मरण करने की प्रेरणा देता है।
भाव यह है कि भैरव जी केवल दंड देने वाले नहीं, बल्कि कृपालु, रक्षक और भक्तों के कष्ट हरने वाले देवता हैं।
वे अज्ञान, पाप, अहंकार और भय को नष्ट कर साधक को निर्भय बनाते हैं।
अर्थ / भावार्थ
भैरव भगवान दुष्ट शक्तियों का संहार करते हैं
भक्तों के कष्ट, भय और रोग दूर करते हैं
पापों का नाश कर शुद्ध बुद्धि प्रदान करते हैं
जीवन में साहस, आत्मविश्वास और स्थिरता देते हैं
साधक को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं
यह स्तोत्र विशेष रूप से भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा और मानसिक अशांति में अत्यंत प्रभावी माना जाता है।