अच्युताष्टकं - Achyutashtakam
परिचय
श्री अच्युताष्टकम् भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण के विविध नामों और दिव्य लीलाओं का मधुर स्तवन है। इसमें अच्युत, केशव, माधव, गोविन्द, राम, नारायण आदि नामों के माध्यम से भगवान के अनेक अवतारों और स्वरूपों का स्मरण किया गया है। यह अष्टकम भक्ति, प्रेम और ईश्वर-स्मरण को दृढ़ करने वाला है।
भावार्थ
इस अष्टकम में भक्त भगवान के अनेक नामों का कीर्तन करते हुए उनके राम और कृष्ण दोनों रूपों का वंदन करता है। वे सीतापति राम के रूप में दुष्टों का विनाश करते हैं तथा कृष्ण रूप में कंस, केशी और पूतना का संहार करते हैं। वे गोपिकाओं के प्रिय, द्रौपदी के रक्षक, भक्तवत्सल और करुणामय हैं। भक्त उनके सौन्दर्य, श्यामल रूप, पीताम्बर और अलंकारों का ध्यान करता है और उनसे सदैव रक्षा की प्रार्थना करता है।
फल
जो भक्त प्रेमपूर्वक प्रतिदिन श्री अच्युताष्टकम् का पाठ करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। भगवान हरि शीघ्र ही उस भक्त के वश में होकर उसे अपनी कृपा और प्रेम प्रदान करते हैं।