आजा निंदिया आ मेरे लाल को - Aaja Nindiya Mere Lal Ko
परिचय
यह भजन एक अत्यंत मधुर और वात्सल्य-भाव से परिपूर्ण लोरी है, जिसमें माता यशोदा अपने प्रिय लाडले श्रीकृष्ण को सुलाने के लिए निंदिया (नींद) को आमंत्रित कर रही हैं। इसमें एक माँ के हृदय की कोमलता, स्नेह और ममता का अत्यंत सुंदर चित्रण मिलता है। “छगन मगन” शब्दों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि बालक कृष्ण अपनी चंचल लीलाओं में मग्न हैं और उन्हें सुलाना आसान नहीं है।
इस भजन में श्रीकृष्ण के बालरूप की मोहक छवि उभरकर सामने आती है—उनकी चंचल आंखें, मनमोहक मुस्कान और आंगन में खेलते हुए उनका बाल स्वरूप। माता यशोदा उन्हें सुलाने के लिए प्रेम से लोरी गा रही हैं, ताली बजा रही हैं और निंदिया को बुला रही हैं कि वह आकर उनके लाल को सुला दे।
भावार्थ
इस भजन का भाव अत्यंत कोमल और हृदयस्पर्शी है। इसमें माता यशोदा अपने बालक कृष्ण को सुलाने के लिए निंदिया को पुकारती हैं। वह कहती हैं कि उनका लाल बहुत चंचल है, उसकी आंखों में श्याम का सुंदर रूप बसता है, इसलिए वह आसानी से सोता नहीं है।
“जप तप पूजा पाठ सो, विधि न दिया मोहे लाल” पंक्ति यह दर्शाती है कि माता कहती हैं कि उन्होंने कोई विशेष तप या पूजा नहीं की, फिर भी उन्हें इतना सुंदर और दिव्य पुत्र मिला है—यह उनके लिए प्रभु की असीम कृपा है।