तुम हमारे थे प्रभुजी - Tum Humare The Prabhu Ji
परिचय
“तुम हमारे थे प्रभुजी” एक अत्यंत भावपूर्ण राधा-कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम संबंध को व्यक्त किया गया है। इस भजन में भक्त स्वयं को पूर्ण रूप से प्रभु को समर्पित करता है और उनसे सदा साथ निभाने की प्रार्थना करता है। यह भजन विशेष रूप से सत्संग, राधा-कृष्ण कीर्तन और भक्ति सभाओं में गाया जाता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त प्रभु को अपना सर्वस्व मानता है। वह कहता है कि प्रभु ही उसके सच्चे साथी हैं और उनके सिवा कोई दूसरा सहारा नहीं। संसार की माया छोड़कर उसने प्रभु से प्रेम का नाता जोड़ा है। भक्त प्रभु से विनती करता है कि वे सच्चे प्रेम की मर्यादा निभाएँ और उसे अपनी शरण में स्वीकार करें। अंत में वह अपनी अंतिम आशा व्यक्त करता है कि प्रभु उसे हृदय से लगा लें और सदा अपने साथ रखें। यह भजन पूर्ण समर्पण, निष्कपट प्रेम और ईश्वर पर अटूट विश्वास की भावना को दर्शाता है।