तू है सखी बड भाग बडी - Tu He Sakhi Bad Bhag Badi
परिचय
यह अत्यंत मधुर और भावपूर्ण कृष्ण भजन ब्रज की सखी भाव भक्ति को सुंदर रूप में प्रस्तुत करता है। इस भजन में एक सखी दूसरी सखी के सौभाग्य की प्रशंसा करती है, क्योंकि स्वयं नन्दलाल श्रीकृष्ण उसके घर पधारने वाले हैं। भजन में सखी के श्रृंगार, उसके आनंद और श्रीकृष्ण के आगमन की मधुर प्रतीक्षा का सुंदर वर्णन है। श्रीकृष्ण की प्रेममयी छवि और उनके प्रति ब्रजवासियों की गहरी भक्ति इस भजन को अत्यंत भावुक बना देती है। कुंभनदास जी की रचना होने के कारण इस भजन में पुष्टिमार्गीय भक्ति और सखी भाव की मधुरता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। भक्त का सम्पूर्ण हृदय श्रीकृष्ण के प्रेम और उनके स्वागत में समर्पित हो जाता है।
भावार्थ
इस भजन में एक सखी दूसरी सखी से कहती है कि वह अत्यंत भाग्यशाली है, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण उसके घर आने वाले हैं। सखी अपने प्रियतम के स्वागत के लिए श्रृंगार कर रही है और हाथ में दर्पण लेकर स्वयं को सजा रही है।
भक्त कहता है कि संसार के सभी लोग श्रीकृष्ण के गुणों का गान करते हैं, लेकिन श्रीकृष्ण स्वयं अपने भक्तों के प्रेम के वश में रहते हैं और उनके प्रेम को सबसे अधिक महत्व देते हैं।
अंत में कुंभनदास जी कहते हैं कि गिरधर प्रभु अपने भक्तों के प्रेम में इस प्रकार बंध जाते हैं मानो स्वयं को उनके हाथों बेच देते हों। यही इस भजन का मुख्य भाव है।