Teri Ankhiya He Jadu Bhari Bihari Mai To Kabse Khadi

तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी मैं तो कब से खड़ी - Teri Ankhiya He Jadu Bhari Bihari Mai To Kabse Khadi
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तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी मैं तो कब से खड़ी - Teri Ankhiya He Jadu Bhari Bihari Mai To Kabse Khadi

परिचय यह अत्यंत मधुर और प्रेमरस से परिपूर्ण श्रीबिहारी जी का भजन भक्त और भगवान के मधुर प्रेम भाव का सुंदर चित्रण करता है। इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण की मनमोहक आँखों और उनकी आकर्षक छवि का वर्णन करते हुए अपने हृदय की प्रेमपूर्ण अवस्था व्यक्त करता है। भजन में भक्त कहता है कि श्रीबिहारी जी की जादू भरी आँखों ने उसके मन को पूरी तरह मोहित कर लिया है। अब उसका मन संसार में कहीं नहीं लगता और वह केवल अपने प्रिय श्याम के दर्शन के लिए उनके द्वार पर खड़ा रहता है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के निष्कपट प्रेम, समर्पण और विरह की मधुर भावना को अत्यंत सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करता है। भावार्थ इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण से कहता है कि उनकी सुंदर और जादू भरी आँखों ने उसके मन पर ऐसा प्रभाव डाला है कि वह पूरी तरह उनके प्रेम में डूब गया है। भक्त अनुभव करता है कि श्रीकृष्ण की मोहिनी छवि ने उसके हृदय को अपने वश में कर लिया है। भक्त यह भी कहता है कि उसे संसार में श्रीकृष्ण जैसा कोई दूसरा सहारा या प्रिय नहीं मिला। इसलिए उसने अपना सम्पूर्ण प्रेम और विश्वास केवल उन्हीं पर समर्पित कर दिया है। अंत में भक्त कहता है कि वह श्रीकृष्ण के द्वार पर उनकी कृपा और दर्शन की प्रतीक्षा में खड़ा है। यही सच्चे प्रेम और भक्ति का भाव इस भजन की आत्मा है।