सावन की रुत है आजा माँ - Sawan Ki Rut Hai Aaja Maa
परिचय
“सावन की रुत है आजा माँ” एक मधुर और उत्सवमय देवी भजन है, जो सावन मास में विशेष रूप से गाया जाता है। इसमें भक्त माँ को झूला झुलाने, फूलों से सजाने और मेहंदी लगाने की प्रेमपूर्ण भावना व्यक्त करता है। यह भजन सावन झूला उत्सव और नवरात्रि के अवसर पर अत्यंत लोकप्रिय है।
भावार्थ
भजन में सावन की हरियाली और आनंद के बीच भक्त माँ को अपने आँगन में बुलाता है। चुनरी, चूड़ी, पायल और कंगन अर्पित करना भक्त की श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।
“लाखों है रूप माँ तेरे” — यह पंक्ति दर्शाती है कि माँ अनेक रूपों में प्रकट होती हैं, और भक्त केवल एक झलक के लिए व्याकुल है।
झूला झुलाने और भोग लगाने का वर्णन भक्ति के प्रेम और उत्सव को प्रकट करता है।
पाठ का फल
इस भजन को सावन मास में श्रद्धा से गाने से मन में आनंद और उत्साह उत्पन्न होता है।
भक्ति और प्रेम की भावना प्रबल होती है।
घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का वास होता है।