श्री रुद्राष्टकम् - Shree Rudrashtakam
परिचय
रुद्राष्टकम् एक अत्यंत प्रसिद्ध शिव-अष्टकम् है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की। इसमें भगवान शिव के निर्गुण, निराकार, महाकाल, करुणामय और सच्चिदानन्द स्वरूप का गूढ़ और भक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है।
भावार्थ
यह अष्टकम् भक्त की पूर्ण शरणागति को दर्शाता है। साधक स्वीकार करता है कि उसे न योग आता है, न जप-तप, फिर भी वह शिव को ही अपना एकमात्र आश्रय मानता है। भगवान शिव ही जन्म-मृत्यु, दुःख और संसार के बंधनों से मुक्त करने वाले हैं।
अर्थ (संक्षिप्त व्याख्या)
निर्वाण रूपं – मोक्ष स्वरूप
निर्गुण, निर्विकल्प – गुणों और कल्पनाओं से परे
महाकाल – काल के भी स्वामी
नीलकण्ठ – विषपान करने वाले
भवानीपति – माता पार्वती के स्वामी
शम्भो – कल्याणकर्ता