Purushottam Mas

 चौराष्टकम् - Chaurastakam
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चौराष्टकम् - Chaurastakam

चौराग्रगण्य पुरुषाष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण के उस अलौकिक रूप का स्तवन है जिसमें वे नवनीतचौर — अर्थात् माखन चोर — के रूप में प्रकट होते हैं। यह अष्टकम केवल बाह्य लीलाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि श्रीकृष्ण भक्तों के पाप, अहंकार, आसक्ति और बंधनों को चुरा लेने वाले परम करुणामय भगवान हैं। इस अष्टकम में भक्त स्वयं अपने हृदय को श्रीकृष्ण का कारागार मानकर उन्हें वहीं सदा के लिए बाँध लेना चाहता है। भावार्थ (संक्षेप) इस अष्टकम का केंद्रीय भाव यह है कि श्रीकृष्ण संसार के साधारण चोर नहीं, बल्कि सर्वोच्च चोर हैं — जो भक्तों के पाप, मोह, भवबंधन, यमपाश और अहंकार तक को चुरा लेते हैं। वे धन, मान और इन्द्रियों को हरकर जीव को पूर्णतः शरणागत बना देते हैं। भक्त यह स्वीकार करता है कि प्रभु ने उसका सब कुछ चुरा लिया है और अब वह उन्हें अपने हृदय-रूपी कारागार में भक्तिरूपी बंधन से बाँधकर सदा के लिए रोक लेना चाहता है।
पुरुषोत्तम (Purushottam) की जानकारी | Purushottam Maas Start and End date | Adhik Mass 2026
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पुरुषोत्तम (Purushottam) की जानकारी | Purushottam Maas Start and End date | Adhik Mass 2026

पुरुषोत्तम (Purushottam) की जानकारी | Purushottam Maas Start and End date | Adhik Mass 2026 #revivingculture #adhikmaas #purshotam #purushottammaaskikatha #malmass ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ पुरुषोत्तम (Purushottam) का अर्थ "पुरुषों में उत्तम" या "सर्वश्रेष्ठ पुरुष" होता है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है: पुरुष (व्यक्ति) + उत्तम (श्रेष्ठ)। यह मुख्य रूप से एक हिंदू नाम और धार्मिक उपाधि है।मुख्य अर्थ और विवरण:भगवान विष्णु और कृष्ण: यह नाम अक्सर भगवान विष्णु या उनके अवतार भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के लिए एक विशेषण के रूप में प्रयोग किया जाता है।अधिकमास: हिंदू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार, हर तीन साल में आने वाले चंद्र मास (अतिरिक्त महीने) को 'पुरुषोत्तम मास' या 'मलमास' कहा जाता है, जो भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित होता है।सामासिक अर्थ: व्याकरण की दृष्टि से यह 'अधिकरण तत्पुरुष' समास है, जिसका अर्थ है—पुरुषों (मनुष्यों) के बीच में जो सबसे उत्तम हो।