Mero Mukh Neeko Ki Tero Radhe Pyari

मेरो मुख नीको कि तेरो राधा प्यारी - Mero Mukh Neeko Ki Tero Radhe Pyari
Bhajans

मेरो मुख नीको कि तेरो राधा प्यारी - Mero Mukh Neeko Ki Tero Radhe Pyari

परिचय यह अत्यंत मधुर और रसपूर्ण राधा-कृष्ण भजन श्रीराधा और श्रीकृष्ण के बीच की प्रेममयी नोकझोंक और मधुर संवाद का सुंदर चित्रण करता है। इस भजन में दोनों एक-दूसरे की सुंदरता की प्रशंसा करते हुए प्रेमपूर्ण हास्य और माधुर्य रस का अनुभव कराते हैं। भजन में श्रीराधा रानी और श्रीकृष्ण की छवि, उनके नेत्र, मुखमंडल और प्रेम भरी चेष्टाओं का अत्यंत कोमल एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया है। यह केवल सौंदर्य का वर्णन नहीं बल्कि दिव्य प्रेम और आत्मिक मिलन की मधुर अनुभूति है। भजन की विशेषता इसकी सरल ब्रजभाषा और मधुर भाव हैं, जो भक्त के हृदय में वृन्दावन की दिव्य लीलाओं का अनुभव कराते हैं। यह भजन माधुर्य भक्ति और राधा-कृष्ण प्रेम का सुंदर उदाहरण है। भावार्थ इस भजन में श्रीराधा और श्रीकृष्ण प्रेमपूर्वक एक-दूसरे से पूछते हैं कि दोनों में अधिक सुंदर कौन है। श्रीराधा अपने गौर वर्ण और चंद्रमा जैसे मुख की बात करती हैं, जबकि श्रीकृष्ण अपनी श्याम सुंदर छवि से भक्तों का मन मोह लेते हैं। भजन में यह भी बताया गया है कि श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया, जबकि श्रीराधा ने अपने हृदय में स्वयं गिरधारी को बसाया हुआ है। यह प्रेम और समर्पण का अत्यंत सुंदर प्रतीक है। अंत में कवि सूरदास जी कहते हैं कि राधा-कृष्ण की यह दिव्य छवि इतनी मनोहर है कि भक्त की आँखें उनसे हट नहीं पातीं। यही इस भजन का मुख्य भाव है।