मन राधारमन का दीवाना है - Man Radharaman ka deewana hai
परिचय
यह अत्यंत मधुर, प्रेमरस से भरा और भावविभोर कर देने वाला भजन श्री राधारमण जी की मोहिनी छवि, उनकी असीम करुणा और भक्त के गहरे समर्पण का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन में भक्त अपने आराध्य प्रभु के प्रति उस दिव्य प्रेम को व्यक्त करता है जिसमें संसार की हर वस्तु फीकी लगने लगती है। श्री राधारमण जी के मनमोहक नेत्र, उनकी मधुर छवि और कृपामयी स्वभाव ने भक्त के मन को पूरी तरह अपना बना लिया है। भजन के शब्दों में प्रेम, विश्वास, शरणागति और प्रभु कृपा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह भजन भक्त के उस भाव को प्रकट करता है जहाँ वह अपने जीवन के हर सुख-दुख में केवल प्रभु को ही अपना सहारा मानता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त कहता है कि उसका मन पूरी तरह श्री राधारमण जी का दीवाना हो चुका है। प्रभु की करुणा और प्रेम ने उसके हृदय पर ऐसा प्रभाव डाला है कि अब उसे संसार की किसी वस्तु में आकर्षण नहीं दिखाई देता। भक्त श्रीकृष्ण के सुंदर और कटीले नेत्रों का वर्णन करते हुए कहता है कि वह उनमें पूरी तरह डूब जाना चाहता है। आगे वह स्वीकार करता है कि जीवन में चाहे कितने भी तूफान आए हों, प्रभु ने हर बार उसका हाथ थामा और उसे संभाला। भगवान ने उसके दुखों को दूर कर जीवन को आनंद और कृपा से भर दिया। यह भजन भक्त और भगवान के बीच गहरे प्रेम, विश्वास और आत्मिक संबंध की अत्यंत सुंदर अभिव्यक्ति है।