Kevalashtakam - कैवल्याष्टकम्
कैवल्याष्टकम् (जिसे केवलाष्टक भी कहा जाता है) भगवान श्रीहरि के नाम-महात्म्य को प्रकट करने वाला अत्यंत प्रभावशाली वैष्णव स्तोत्र है। इस अष्टक में यह प्रतिपादित किया गया है कि समस्त संसार माया से आवृत है और इस भवसागर से पार उतरने का एकमात्र सत्य और शाश्वत साधन “हरि नाम” ही है। यह स्तोत्र भक्ति, वैराग्य और आत्मबोध का सार प्रस्तुत करता है।
भावार्थ (संक्षेप)
इस कैवल्याष्टकम् का केंद्रीय भाव यह है कि हरि का नाम ही सर्वश्रेष्ठ साधन और परम सत्य है। यह नाम सबसे अधिक मधुर, मंगलकारी और पावन है। यह अष्टकम् संसार की नश्वरता और जीवन की अनिश्चितता को स्पष्ट करते हुए बताता है कि सभी दुःखों से मुक्ति का एकमात्र उपाय भगवान के नाम का निरंतर स्मरण और कीर्तन है।
हरि-नाम ही गुरु, पिता, माता और सच्चा बंधु है। बाल्यकाल से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक नाम-स्मरण करने से चित्त शुद्ध होता है और साधक को शुद्ध चिदानन्द स्वरूप का अनुभव प्राप्त होता है।