कर्पूरगौरं करुणावतारं - Karpur Gauram Karunavtaram
यह अत्यंत प्रसिद्ध और दिव्य शिव स्तुति भगवान शिव के शांत, करुणामय और कल्याणकारी स्वरूप का सुंदर वर्णन करती है। “कर्पूरगौरं” श्लोक का पाठ विशेष रूप से पूजा, आरती, ध्यान और शिव उपासना के समय किया जाता है। इस स्तुति में भगवान शिव को कर्पूर के समान गौर वर्ण वाला, समस्त संसार का सार तथा नागराज को हार स्वरूप धारण करने वाला बताया गया है। भक्त अपने हृदय कमल में माता भवानी सहित विराजमान भगवान शिव को प्रणाम करता है। यह छोटा सा श्लोक अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है और मन को शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।