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Kamada Ekadashi Kab Hai
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कामदा एकादशी व्रत कथा - Kamda Ekadashi Vrat Katha
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में रत्नपुर नाम के नगर में राजा पुण्डरीक का शासन था। वहां ललित नाम का एक गंधर्व और उसकी पत्नी ललिता रहते थे जो एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। एक दिन राजा की सभा में ललित गीत गा रहा था लेकिन उसका ध्यान अपनी पत्नी की यादों में भटक गया और सुर बिगड़ गए। इससे क्रोधित होकर राजा पुण्डरीक ने उसे राक्षस बनने का श्राप दे दिया। ललित भयानक राक्षस बन गया और भटकने लगा। अपने पति की इस हालत से दुखी होकर ललिता ऋष्यशृंग ऋषि के पास गई। ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने विधि-विधान से व्रत किया और उसका फल अपने पति को समर्पित कर दिया। व्रत के पुण्य प्रभाव से ललित वापस अपने दिव्य गंधर्व रूप में आ गया और दोनों को मोक्ष की प्राप्ति हुई।