Jo Prem Gali Mai Aaye Nahi

जो प्रेम गली में आये नहीं - Jo Prem Gali Mai Aaye Nahi
Bhajans

जो प्रेम गली में आये नहीं - Jo Prem Gali Mai Aaye Nahi

परिचय यह भावपूर्ण भक्ति पद प्रेम और भक्ति के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि केवल ज्ञान या शास्त्र पढ़ने से भगवान की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि सच्चा प्रेम और निर्मल हृदय ही प्रभु तक पहुँचने का मार्ग है। इस पद में भक्ति मार्ग की गहनता और प्रेम की महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। भावार्थ इस पद में कहा गया है कि जिसने प्रेम की गली में प्रवेश ही नहीं किया, वह प्रियतम अर्थात भगवान के वास्तविक स्वरूप को कैसे जान सकता है। केवल शास्त्रों का अध्ययन या ज्ञान की बातें करने से भगवान की प्राप्ति नहीं होती, यदि हृदय में प्रेम और निर्मलता न हो। दुनिया माया में उलझी हुई है और जो प्रभु के दर्शन नहीं कर पाया, वह उनके स्वरूप का वर्णन भी नहीं कर सकता। अंत में मीरा का उदाहरण देकर बताया गया है कि सच्चा भक्त प्रभु के प्रेम में दीवाना हो जाता है, जबकि संसार उसके प्रेम की गहराई को समझ ही नहीं पाता।