जय राम रमा रमनं समनं - Jai Ram Rama Ramnam
परिचय
यह भक्तिमय स्तुति भगवान श्रीराम की महिमा का गान करती है। इसमें प्रभु श्रीराम को दीनों के रक्षक, रावण-विनाशक, धर्म के संस्थापक तथा शरणागतवत्सल स्वरूप में स्मरण किया गया है। “राजा राम, सीता राम” का संकीर्तन हृदय में प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण की भावना को जागृत करता है। इस स्तुति में भक्त यह स्वीकार करता है कि संसार के रोग, मोह और दुःख प्रभु के चरणों की भक्ति के बिना दूर नहीं होते।
भावार्थ
यह स्तुति बताती है कि श्रीराम का नाम और उनके चरणों की भक्ति ही भवसागर से पार लगाने वाली है। जिनके हृदय में राम प्रेम नहीं, वे संसार के दुःखों में उलझे रहते हैं। भक्त अंत में प्रभु से यही वरदान मांगता है कि उसे सदा उनके चरणों की अखंड भक्ति और संतों का संग प्राप्त हो।
पाठ का फल
भय और संताप का नाश
मन में शांति और भक्ति की वृद्धि
रामनाम के जप से आध्यात्मिक उन्नति
सत्संग और सद्बुद्धि की प्राप्ति