श्री गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् - Shree Govind Damodar Stotram
परिचय
गोविन्द दामोदर माधवेति स्तोत्रम् भगवान श्रीकृष्ण के नाम-स्मरण की महिमा का अत्यंत मधुर और हृदयस्पर्शी स्तोत्र है। इसमें यह प्रतिपादित किया गया है कि जीवन की प्रत्येक अवस्था में, चाहे वह सुख हो, दुःख हो, निद्रा हो अथवा अंतिम क्षण, श्रीकृष्ण का नाम ही परम आश्रय है। यह स्तोत्र भक्त के मन को संसार से हटाकर भगवान के चरणों में स्थिर करता है।
स्तोत्र का भाव
इस स्तोत्र का भाव यह है कि जिह्वा से निरंतर भगवान के मधुर नामों का स्मरण किया जाए। नाम स्वयं अमृत है और वही साधन भी है तथा वही साध्य भी। बालकृष्ण का स्मरण, गोपियों का नामोच्चार और गृहस्थ जीवन में भी भक्ति की सिद्धि — यही इस स्तोत्र का मूल भाव है।
अर्थ का सार
यह स्तोत्र सिखाता है कि
भगवान का नाम ही सबसे बड़ा धन है।
नाम-स्मरण से मन शुद्ध होता है।
नाम मृत्यु के भय को नष्ट करता है।
नाम से ही परम गति की प्राप्ति होती है।
जिसकी जिह्वा पर अंत समय में श्रीकृष्ण का नाम है, वह बंधन से मुक्त हो जाता है।