श्री गिरिराजअष्टकम् - Shree Giriraj Ashtakam
परिचय
श्री गिरिराजधारी अष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धनधारी स्वरूप की स्तुति है।
इस अष्टकम् में ब्रजलीला, माखनचोरी, रासलीला, वंशी-नाद, गोवर्धन लीला और करुणामय कृष्ण स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है।
भावार्थ (समग्र भाव)
यह अष्टकम् दर्शाता है कि
भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करने वाले,
अहंकार का नाश करने वाले,
करुणा, माधुर्य और रस से परिपूर्ण हैं।
जो श्रद्धा से गिरिराजधारी का स्मरण करता है, उसके जीवन के कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।
गायन / पाठ का समय
प्रातःकाल
ब्रज / वृन्दावन स्मरण के समय
एकादशी
जन्माष्टमी
गोवर्धन पूजा
रासलीला अथवा कृष्ण भजन से पहले
पाठ से प्राप्त फल
भक्ति में वृद्धि
मन की शांति
अहंकार का नाश
गृहस्थ जीवन में माधुर्य
श्रीकृष्ण कृपा की प्राप्ति