गिरधर जनम मरण रा साथी - Girdhar Janam Maran ra Sathi
परिचय
यह अत्यंत भावपूर्ण और विरह रस से ओतप्रोत मीरा भजन भगवान श्रीगिरधर गोपाल के प्रति मीरा बाई के अटूट प्रेम और समर्पण का सुंदर चित्रण करता है। इस भजन में मीरा जी श्रीकृष्ण को अपने जन्म-जन्मांतर का साथी मानकर उनके प्रति अपनी गहरी भक्ति व्यक्त करती हैं।
भजन में विरह, प्रेम और आत्मिक समर्पण की अद्भुत अनुभूति दिखाई देती है। मीरा जी कहती हैं कि उनके लिए संसार के सभी संबंध मिथ्या हैं और केवल श्रीगिरधर ही उनके सच्चे सहारे हैं। उनके बिना एक क्षण भी चैन नहीं मिलता और आँखें निरंतर प्रभु दर्शन के लिए व्याकुल रहती हैं।
यह भजन सच्ची भक्ति, निष्काम प्रेम और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।
भावार्थ
इस भजन में मीरा बाई कहती हैं कि भगवान श्रीगिरधर गोपाल ही उनके जन्म और मृत्यु तक के सच्चे साथी हैं। वे दिन-रात उनका स्मरण करती हैं और कभी उन्हें भूलना नहीं चाहतीं।
मीरा जी प्रभु के दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल हैं। वे मार्ग की ओर निहारते हुए आँसू बहाती हैं और श्रीकृष्ण की सुंदर छवि को देखकर आनंद अनुभव करती हैं।
अंत में मीरा जी यह संदेश देती हैं कि संसार के सभी संबंध क्षणिक और असत्य हैं, जबकि भगवान का प्रेम ही शाश्वत है। इसलिए मनुष्य को अपने चित्त को भगवान की भक्ति में लगाकर जीवन को सफल बनाना चाहिए।