Devi Chitralekha

Bhajans
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी - Shri Krishna Govind Hare Murari
परिचय
“श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” एक अत्यंत प्रसिद्ध और पावन श्रीकृष्ण भजन है। यह नाम-संकीर्तन शैली का भजन है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु के दिव्य नामों का जप किया जाता है। यह भजन मंदिरों, सत्संग, भजन संध्या और जन्माष्टमी जैसे पावन अवसरों पर श्रद्धा से गाया जाता है।
भावार्थ
इस भजन में भक्त भगवान को उनके विभिन्न नामों — कृष्ण, गोविंद, मुरारी, नारायण, वासुदेवा — से पुकारता है। इन नामों का स्मरण करते हुए वह प्रभु की शरण में जाता है और अपनी भक्ति व्यक्त करता है। यह भजन नाम-जप की महिमा को दर्शाता है। भगवान के पवित्र नामों का संकीर्तन करने से मन शांत होता है, श्रद्धा बढ़ती है और आत्मा को दिव्य आनंद की अनुभूति होती है।

Katha Vachak
देवी चित्रलेखा - Shri Devi Chitralekha
संक्षिप्त परिचय
देवी चित्रलेखा जी भारत की प्रसिद्ध युवा कथावाचिका और आध्यात्मिक वक्ता हैं। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा और भक्ति मार्ग के माध्यम से देश-विदेश में लाखों भक्तों को प्रभु भक्ति से जोड़ा और व्यापक श्रद्धा प्राप्त की।
पारिवारिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि
देवी चित्रलेखा जी एक संस्कारवान ब्राह्मण परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता, श्री टीकाराम शर्मा और श्रीमती चमेली देवी, उन्हें बचपन से ही धर्म, भक्ति और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देते रहे। दादा-दादी से उन्हें गहरे आध्यात्मिक संस्कार विरासत में मिले, और ब्रज क्षेत्र की दिव्य संस्कृति ने उनके व्यक्तित्व को प्रारंभ से ही आध्यात्मिक दिशा दी। उनका एक भाई प्रत्यक्ष शर्मा है।
दीक्षा और प्रारंभिक प्रवचन
केवल 4 वर्ष की आयु में उन्हें गौड़ीय वैष्णव परंपरा में दीक्षा प्राप्त हुई। 6 वर्ष की उम्र में बरसाना में दिया गया उनका पहला सार्वजनिक प्रवचन सभी को मंत्रमुग्ध कर गया। इसके बाद वृंदावन के समीप तपोवन में उनकी पहली 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसने उनके कथा जीवन की मजबूत नींव रखी।
विशेष प्रतिभा और शिक्षा
देवी चित्रलेखा जी ने औपचारिक रूप से कहीं से कथा या संगीत का प्रशिक्षण नहीं लिया, फिर भी वे कथा वाचन, भजन गायन और हारमोनियम वादन में अद्भुत निपुणता रखती हैं। वे शिक्षा के महत्व को भी समझती हैं और उन्होंने सामान्य पब्लिक स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी कर सांसारिक और आध्यात्मिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाए रखा।
विवाह और पारिवारिक जीवन
23 मई 2017 को देवी चित्रलेखा जी का विवाह माधव प्रभु जी (माधव तिवारी) से हरियाणा के पलवल में संपन्न हुआ। माधव प्रभु जी मूल रूप से बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और आध्यात्मिकता में गहरी आस्था रखते हैं। यह दंपति मिलकर समाज और धर्म सेवा में सक्रिय योगदान दे रहा है।
सेवा कार्य और जीवन उद्देश्य
देवी चित्रलेखा जी ने गौ सेवा धाम की स्थापना कर बीमार और घायल गायों की सेवा का कार्य प्रारंभ किया। इसके साथ-साथ वे संकीर्तन यात्राओं के माध्यम से भारत सहित अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और अफ्रीका जैसे देशों में भी भक्ति कार्यक्रम आयोजित करती हैं। उनका जीवन उद्देश्य राधा-कृष्ण भक्ति और हरे कृष्ण महामंत्र को पूरे विश्व में फैलाना है, जिसे वे गुरु आज्ञा के अनुसार पूर्ण समर्पण भाव से निभा रही हैं।