Chalisa

श्री महालक्ष्मी चालीसा - Shree Mahalakshmi Chalisa
Chalisa

श्री महालक्ष्मी चालीसा - Shree Mahalakshmi Chalisa

यह पावन महालक्ष्मी चालीसा धन, ऐश्वर्य, सुख, समृद्धि और मंगल की अधिष्ठात्री माता महालक्ष्मी की महिमा का वर्णन करती है। इसमें माता के दिव्य स्वरूप, उनकी कृपा, सृष्टि निर्माण की शक्ति तथा भक्तों पर बरसने वाले उनके अनुग्रह का सुंदर वर्णन किया गया है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास से इस चालीसा का पाठ करता है, माता उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण कर जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
श्री गोपाल चालीसा - Shree Gopal Chalisa
Chalisa

श्री गोपाल चालीसा - Shree Gopal Chalisa

गोपाल चालीसा भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्तवत्सल स्वरूप, धर्म स्थापना और भक्तों के उद्धार का अत्यंत सुंदर एवं भक्तिमय वर्णन करने वाली पावन चालीसा है। इस चालीसा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर बाल्यकाल की अद्भुत लीलाओं, वृंदावन की मधुर रासलीलाओं, असुरों के संहार, गोवर्धन धारण, कंस वध, भक्तों के कल्याण तथा महाभारत में अर्जुन को दिए गए भगवद्गीता के अमर उपदेश तक अनेक दिव्य प्रसंगों का उल्लेख मिलता है।
श्री कैला देवी चालीसा - Shree Kaila Devi Chalisa
Chalisa

श्री कैला देवी चालीसा - Shree Kaila Devi Chalisa

यह पावन कैला देवी चालीसा माता कैला देवी की महिमा, शक्ति, करुणा और भक्तों पर उनकी असीम कृपा का वर्णन करती है। राजस्थान के करौली धाम में विराजमान माता कैला देवी को आदिशक्ति, जगदम्बा और दुर्गा स्वरूप माना जाता है। इस चालीसा में माता के विभिन्न दिव्य रूपों का स्मरण करते हुए उनकी स्तुति की गई है।
श्री गिरिराज चालीसा - Shree Giriraj Chalisa
Chalisa

श्री गिरिराज चालीसा - Shree Giriraj Chalisa

श्री गोवर्धन चालीसा ब्रजधाम के पावन गोवर्धन पर्वत की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन है। गोवर्धन पर्वत को भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने इन्द्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए इसी गिरिराज को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण किया था। यह चालीसा गिरिराज जी की पूजा, उनकी कृपा, और ब्रजवासियों पर हुए उनके उपकारों का स्मरण कराती है। ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है।
श्री जगन्नाथ चालीसा - Shree Jagannath Chalisa
Chalisa

श्री जगन्नाथ चालीसा - Shree Jagannath Chalisa

यह “श्री जगन्नाथ चालीसा” भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा, करुणा और भक्तवत्सल स्वरूप का विस्तार से वर्णन करती है। दोहा और चौपाई छंद में रचित यह चालीसा भगवान के धाम, उनकी रथ यात्रा, तथा भक्तों पर की गई विशेष कृपा का सुंदर वर्णन प्रस्तुत करती है। इसका पाठ विशेष रूप से रथ यात्रा, आषाढ़ मास, गुरुवार, तथा श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धा से किया जाता है।
श्री गंगा चालीसा - Shree Ganga Chalisa
Chalisa

श्री गंगा चालीसा - Shree Ganga Chalisa

गंगा चालीसा माँ गंगा के पावन रूप, उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व का सुंदर स्तवन है। यह चालीसा माँ गंगा की लीलाओं, उनकी पवित्रता और भक्तों पर कृपा का वर्णन करती है। इसमें उनके तीर्थों, जलधाराओं और धर्म-रक्षा करने वाले कार्यों का विशेष उल्लेख है। इसे पढ़ने से भक्तों के हृदय में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।
 श्री सरस्वती चालीसा - Shree Saraswati Chalisa
Chalisa

श्री सरस्वती चालीसा - Shree Saraswati Chalisa

श्री सरस्वती चालीसा विद्या, बुद्धि, वाणी और विवेक की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की स्तुति रूप चालीसा है। इसमें माता सरस्वती के दिव्य स्वरूप, उनकी करुणा, तथा अज्ञान के नाशक स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है। यह चालीसा विशेष रूप से विद्यार्थियों, लेखकों, कवियों और साधकों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
श्री सीता माता चालीसा - Shree Site Mata Chalisa
Chalisa

श्री सीता माता चालीसा - Shree Site Mata Chalisa

यह रचना श्रीसीता राम चालीसा है, जिसमें माता सीता एवं भगवान श्रीराम के जीवन, विवाह, वनवास, विरह, विजय और मर्यादित आदर्शों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। इस चालीसा में जनकसुता सीता को पतिव्रता, करुणामयी, धर्मस्वरूपा और मर्यादा की प्रतिमूर्ति के रूप में स्मरण किया गया है। दोहा–चौपाई शैली में रचित यह चालीसा रामायण की प्रमुख घटनाओं को भक्तिभाव से प्रस्तुत करती है।
श्री नवग्रह चालीसा - Shree Navgrah Chalisa
Chalisa

श्री नवग्रह चालीसा - Shree Navgrah Chalisa

नवग्रह चालीसा हिंदू धर्म में नवग्रहों—सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु—की कृपा प्राप्त करने हेतु रचित एक पावन स्तुति है। इस चालीसा में प्रत्येक ग्रह की अलग-अलग स्तुति कर उनसे जीवन के कष्ट, ग्रहदोष और मानसिक अशांति के निवारण की प्रार्थना की जाती है। यह रचना भक्त के जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाली मानी जाती है।
श्री पार्वती चालीसा - Shree Parvati Chalisa
Chalisa

श्री पार्वती चालीसा - Shree Parvati Chalisa

पार्वती चालीसा माता पार्वती की महिमा, तप, सौंदर्य और करुणा का भावपूर्ण वर्णन है। माता पार्वती को शक्ति, भक्ति, सहनशीलता और मातृत्व का स्वरूप माना जाता है। वे भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं तथा गणपति और कार्तिकेय की जननी हैं। इस चालीसा के पाठ से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति, वैवाहिक सौहार्द और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।
श्री कृष्ण चालीसा - Shree Krishan Chalisa
Chalisa

श्री कृष्ण चालीसा - Shree Krishan Chalisa

श्रीकृष्ण चालीसा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, रूप-सौंदर्य, करुणा और भक्तवत्सलता का सुंदर स्तवन है। इसमें बाल लीलाओं से लेकर कंस वध, गोवर्धन धारण, रास लीला और भक्तों पर की गई कृपा का भावपूर्ण वर्णन मिलता है। यह चालीसा श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, प्रेम और आत्मिक शांति का संचार करती है।
श्री राधा चालीसा - Shree Radha Chalisa
Chalisa

श्री राधा चालीसा - Shree Radha Chalisa

श्री राधा चालीसा, ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधा रानी की महिमा का स्तवन है। राधा जी को कृष्ण की आत्मा और भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है। यह चालीसा प्रेम, करुणा और निष्काम भक्ति का भाव जाग्रत करती है।
श्री भैरव चालीसा - Shree Bhairav Chalisa
Chalisa

श्री भैरव चालीसा - Shree Bhairav Chalisa

श्री भैरव चालीसा भगवान शिव के उग्र एवं रक्षक स्वरूप काल भैरव की स्तुति है। श्री भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है और वे समस्त भय, बाधा तथा नकारात्मक शक्तियों के नाशक हैं। यह चालीसा काशी, विश्वनाथ और शिव भक्ति से गहराई से जुड़ी हुई है। भैरव बाबा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें निर्भय बनाते हैं।
श्री अन्नपूर्णा माता चालीसा - Shree Annapurna Chalisa
Chalisa

श्री अन्नपूर्णा माता चालीसा - Shree Annapurna Chalisa

श्री अन्नपूर्णा माता चालीसा माँ अन्नपूर्णा की महिमा का वर्णन करने वाला अत्यंत पुण्यदायक स्तोत्र है। माँ अन्नपूर्णा को अन्न, धन, समृद्धि और करुणा की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। काशी नगरी की अधिष्ठात्री होने के कारण माँ अन्नपूर्णा का विशेष महत्व है। यह चालीसा भक्तों को भूख, दरिद्रता और अभाव से मुक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती है।
श्री गायत्री चालीसा - Shree Gayatri Chalisa
Chalisa

श्री गायत्री चालीसा - Shree Gayatri Chalisa

श्री गायत्री माता को वेदों की जननी, ज्ञान-प्रकाश की देवी और समस्त सृष्टि की चेतना माना जाता है। गायत्री माता ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शक्ति स्वरूपा हैं तथा चारों वेदों का मूल इन्हीं से प्रकट हुआ माना जाता है। गायत्री चालीसा का पाठ करने से बुद्धि, विवेक, तेज, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
श्री राम चालीसा - Shree Ram Chalisa
Chalisa

श्री राम चालीसा - Shree Ram Chalisa

राम चालीसा भगवान श्रीराम की भक्ति, करुणा और मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का पावन स्तवन है। इस चालीसा में श्रीराम को भक्तों के रक्षक, दीनों के सहायक और सम्पूर्ण सृष्टि के आधार के रूप में वर्णित किया गया है। इसका पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मन में भक्ति का संचार होता है और जीवन में धर्म, शांति तथा सदाचार की स्थापना होती है।
श्री विष्णु चालीसा - Shree Vishnu Chalisa
Chalisa

श्री विष्णु चालीसा - Shree Vishnu Chalisa

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय । कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।
श्री हनुमान चालीसा का महत्व, अर्थ और पाठ के लाभ- Shree Hanuman Chalisa
Chalisa

श्री हनुमान चालीसा का महत्व, अर्थ और पाठ के लाभ- Shree Hanuman Chalisa

श्री हनुमान चालीसा का पूर्ण पाठ, उसका अर्थ, महत्व और नियमित पाठ से मिलने वाले लाभ।
श्री लक्ष्मी चालीसा - Shree Laxmi Chalisa
Chalisa

श्री लक्ष्मी चालीसा - Shree Laxmi Chalisa

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास । मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस ॥
श्री दुर्गा चालीसा - Shree Durga Chalisa
Chalisa

श्री दुर्गा चालीसा - Shree Durga Chalisa

नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥