Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare

अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे - Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare
Bhajans

अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे - Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare

परिचय यह अत्यंत करुणामय भक्ति पद है जिसमें भक्त भगवान से विनम्र प्रार्थना करता है कि वे उसके दोषों और अवगुणों को न देखें। भक्त स्वीकार करता है कि वह त्रुटियों से भरा हुआ है, किंतु प्रभु की कृपा ही उसे संसार रूपी सागर से पार लगा सकती है। इस पद में भगवान की करुणा, क्षमा और शरणागति का भाव अत्यंत मार्मिक रूप से प्रकट होता है। भावार्थ इस पद में भक्त भगवान से विनती करता है कि यदि आप हमारे दोषों को ही देखते रहेंगे तो हम संसार रूपी भवसागर से कैसे पार हो पाएंगे। भक्त याद दिलाता है कि आपने पहले भी गणिका और अजामिल जैसे पतितों का उद्धार किया है। भक्त स्वीकार करता है कि वह अपवित्र, कुटिल और दोषों से भरा हुआ है, फिर भी वह स्वयं को प्रभु का ही मानता है। इसलिए वह भगवान से प्रार्थना करता है कि वे अपनी करुणा से उसे भी शरण देकर उसका उद्धार करें।