3rd Canto

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कालचक्र का रहस्य: चातुर्मास, अधिकमास (मलमास) और वैदिक समय गणना का श्रीमद्भागवत दृष्टिकोण
मैत्रेय ऋषि भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि काल का यह विशाल चक्र, जिसमें तेरह मास, तीन सौ साठ जोड़, छह ऋतुएँ और अनगिनत क्षण-पल समाहित हैं, अत्यन्त तीव्र गति से सम्पूर्ण जगत को काटता हुआ आगे बढ़ता रहता है। यह सभी जीवों की आयु को कम करता है, किन्तु भगवान के शुद्ध भक्तों की आध्यात्मिक स्थिति पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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जुड़वा बच्चों में बड़ा कौन? जो पहले पैदा हुआ… या जो पहले आया?
अगर किसी के घर जुड़वा बच्चे हों, तो बड़ा किसे माना जाएगा?
जो पहले पैदा हुआ? या जो माँ के गर्भ में पहले आया?
ज़्यादातर लोग बिना सोचे कहेंगे — “जो पहले पैदा हुआ, वही बड़ा है।”
लेकिन हमारे शास्त्र इस प्रश्न का जवाब हज़ारों साल पहले दे चुके हैं — और जवाब इतना सीधा भी नहीं है।

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क्या पिंडदान से सच में मिलती है मुक्ति? जानिए भागवत का रहस्य
इस श्लोक में बताया गया है कि श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पितरों के सम्मान और उनकी शांति के लिए किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा से किया गया पिंडदान पितरों तक पहुँचता है और उनके कल्याण का कारण बनता है।
लेकिन श्रीमद्भागवत यह भी बताता है कि भगवान की भक्ति सबसे श्रेष्ठ मानी गई है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का भजन करता है, उसके साथ उसके पूर्वजों का भी कल्याण होता है।
इसलिए सनातन धर्म में पिंडदान के साथ-साथ भगवान का स्मरण और भक्ति भी अत्यंत आवश्यक मानी गई है।