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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय - Om Namo Bhagavate Vasudevaya
परिचय
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली वैष्णव मंत्र है। यह मंत्र भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंत्र का नियमित जप मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करता है तथा भक्त को ईश्वर से सीधे जोड़ता है। भागवत पुराण में इस मंत्र का विशेष महत्व बताया गया है।
सरल हिंदी अर्थ
मैं भगवान वासुदेव (श्रीकृष्ण / विष्णु) को नमन करता हूँ।
मैं अपने मन, कर्म और जीवन को पूर्ण रूप से भगवान को समर्पित करता हूँ।
मंत्र का भावार्थ
इस मंत्र में भक्त पूर्ण श्रद्धा और विनम्रता के साथ भगवान वासुदेव के चरणों में शरणागति स्वीकार करता है। यह मंत्र अहंकार को दूर कर भक्ति, शांति और दिव्य चेतना का अनुभव कराता है। इसका जप करने से मन स्थिर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
यह मंत्र कब और कैसे जपें
यह मंत्र ब्रह्ममुहूर्त, सुबह-सुबह, ध्यान, जप, पूजा, एकादशी, जन्माष्टमी, या किसी भी शुभ समय पर जपा जा सकता है। इसे 108 बार माला से जपना अत्यंत लाभकारी माना गया है। व्यक्तिगत साधना और सामूहिक कीर्तन — दोनों के लिए यह मंत्र उपयुक्त है।

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जय जय गोवर्धन महाराज - Jai Jai Goverdhan Maharaj
भजन का परिचय
यह भजन “जय जय गोवर्धन महाराज” ब्रज भक्ति परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय और श्रद्धापूर्ण भजन है। इसमें गोवर्धन पर्वत को साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप मानकर उनकी महिमा का गुणगान किया गया है। ब्रजवासियों की आस्था में गोवर्धन महाराज न केवल पर्वत हैं, बल्कि करुणा, संरक्षण और श्रीकृष्ण की लीला का जीवंत प्रतीक हैं।
भजन का भावार्थ
इस भजन में गोवर्धन महाराज के दिव्य श्रृंगार, अलंकार और पूजा-विधि का सुंदर वर्णन है। मुकुट, कुंडल, वैजयंती माला, टीका-रोली और दूध की धार — ये सभी भक्त के प्रेम और समर्पण के प्रतीक हैं।
सात कोस की गोवर्धन परिक्रमा का उल्लेख यह दर्शाता है कि भक्त अपने तन, मन और चरणों से गोवर्धन महाराज की सेवा करता है। भजन का मूल भाव यह है कि जो श्रद्धा से गोवर्धन का स्मरण और परिक्रमा करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
यह भजन कब और कहाँ गाया जाता है
यह भजन विशेष रूप से गोवर्धन पूजा, अन्नकूट उत्सव, कार्तिक मास, ब्रज परिक्रमा और कृष्ण भक्ति के अवसरों पर गाया जाता है।
वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना और इस्कॉन मंदिरों में यह भजन सामूहिक कीर्तन के रूप में अत्यंत लोकप्रिय है।

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श्यामा आन बसों वृन्दावन में - Shyama Aan Bason Vrindavan Mein
“श्यामा आन बसों वृन्दावन में” एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त की विरह-भरी पुकार और श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम प्रकट होता है। इस भजन में भक्त श्यामा (श्रीकृष्ण) से विनती करता है कि वे वृन्दावन में आकर पुनः अपनी बाल और रास लीलाओं से उस भूमि को पावन करें।
भजन के शब्दों में गोकुल और वृन्दावन की लीलाओं, माखन चोरी, मुरली की मधुर धुन, कुंजन, बाग, कुआँ और रास रचाने जैसे दृश्य जीवंत हो उठते हैं। भक्त यह व्यक्त करता है कि उसकी पूरी आयु गोकुल की गलियों में श्रीकृष्ण की बाट जोहते हुए बीत गई है।
यह भजन विरह भक्ति, माधुर्य भाव और वात्सल्य रस से परिपूर्ण है, जो सुनने वाले के हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, तड़प और आत्मिक शांति का अनुभव कराता है। वृन्दावन धाम की स्मृति और कृष्ण-लीला का भाव इस भजन को विशेष रूप से भावुक और भक्तिमय बनाता है।

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मेरा आपकी कृपा से - Mera Aapki Kripa Se
Mera Aapki Kripa Se | Krishna Bhajan

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भाव मेरे तेरे सिवा कौन जान पायेगा - Bhaav Mere Tere Siva koun Jaan payega
Bhaav Mere Tere Siva koun Jaan payega | भाव मेरे तेरे सिवा कौन जान पायेगा

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सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया - Sanwali Soorat Pe Mohan
सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया | Sanwali Soorat Pe Mohan | Krishna Bhajan

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लेने आजा खाटूवाले रींगस के उस मोड़ पे - Lene aaja Khatuwale Ringas ke us mod pe
लेने आजा खाटूवाले रींगस के उस मोड़ पे | Khatu Shyam Bhajan

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गजब मेरे खाटू वाले - Gazab Mere Khatu Wale
गजब मेरे खाटू वाले | Khatu Shyam Bhajan

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लाडला खाटू वाले का - Ladla Khatu Wale Ka
लाडला खाटू वाले का | Ladla Khatu Wale Ka

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पकड़ लो हाथ बनवारी - Pakad Lo Hath Banvari
पकड़ लो हाथ बनवारी Pakad Lo Hath Banvari | Krishna Bhajan

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गोवर्धन वसी सांवरे - Govardhan Wasi Sanwarey
Govardhan Wasi Sanwarey | Krishna Bhajan

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सुनो कृष्ण प्यारे - Suno Krishna Pyaare
Suno Krishna Pyaare | Krishna Bhajan

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तुम प्रेम हो - Tum Prem Ho
Tum Prem Ho | Krishna Bhajan

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अच्युतम केशवम - Achyutam Keshavam
Achyutam Keshavam | Beautiful Krishna Bhajan

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प्यारो वृंदावन – Pyaro Vrindavan | कृष्ण भजन | Indresh Upadhyay Ji
“Pyaro Vrindavan” श्री कृष्ण की पावन लीलास्थली वृंदावन धाम की दिव्यता, माधुर्य और भक्तिरस को व्यक्त करने वाला एक अत्यंत मधुर एवं भावपूर्ण कृष्ण भजन है। यह भजन वृंदावन की गलियों, कुंजों और रास लीलाओं में बसने वाले श्री कृष्ण के अलौकिक प्रेम और करुणा का सुंदर चित्रण करता है।
इस भक्तिमय भजन को स्वर: इंद्रेश उपाध्याय जी ने अपनी मधुर और भावविभोर वाणी में प्रस्तुत किया है, जिसकी प्रत्येक पंक्ति श्रोता के हृदय में भक्ति, शांति और आध्यात्मिक आनंद का संचार करती है। यह भजन न केवल कानों को मधुर लगता है, बल्कि मन को श्री कृष्ण भक्ति में लीन कर देता है।
Pyaro Vrindavan भजन उन सभी भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो श्री कृष्ण, वृंदावन धाम और भक्ति संगीत से प्रेम करते हैं। यह भजन ध्यान, सत्संग और भक्ति के क्षणों में विशेष रूप से सुना जाता है और मन को परम शांति प्रदान करता है।
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करुणा करो कष्ट हरो - Karuna Karo Kasht Haro Gyan Do Bhagwan
Karuna Karo Kasht Haro Gyan Do Bhagwan करुणा करो कष्ट हरो | मन में बसाकर तेरी मूर्ति Krishna Bhajan

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ओ कान्हा अब तो मुरली की - O Kanha Ab To Murli Ki
O Kanha Ab To Murli Ki Full Song | Krishna Bhajan

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तीन बाण के धारी - Teen ban ke dhari
तीन बाण के धारी || Teen ban ke dhari || Khatu Shyam

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श्यामा संग प्रीत - Shyama Sang Preet
Shyama Sang Preet | Khatu Shyam Bhajan

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मैं फिर से खाटू आ गया - Fir Se Khatu Aa Gaya
मैं फिर से खाटू आ गया || Khatu Shyam Baba Bhajan || Fir Se Khatu Aa Gaya