Khatu Maahi Basale Re

खाटू माहि बसाले रे - Khatu Maahi Basale Re
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खाटू माहि बसाले रे - Khatu Maahi Basale Re

परिचय  यह भजन खाटू श्याम बाबा के प्रति एक भक्त के गहरे प्रेम, लगाव और विरह भावना को प्रकट करता है। इसमें भक्त अपने मन की स्थिति बताता है कि जब से वह खाटू धाम से वापस लौटा है, तब से उसका मन कहीं भी नहीं लग रहा। खाटू नगरी की भक्ति, वहां का वातावरण, बाबा का दरबार और फागुन मेले की मधुर यादें उसके हृदय में इतनी बस गई हैं कि अब संसार के काम-काज और सुख उसे आकर्षित नहीं करते। भजन में भक्त बार-बार बाबा से प्रार्थना करता है कि वे उसे फिर से अपने धाम बुला लें और अपने चरणों में स्थान दें। भावार्थ  इस भजन के माध्यम से यह भाव व्यक्त किया गया है कि जब किसी भक्त का मन सच्चे प्रेम और भक्ति से भगवान में लग जाता है, तब संसार की अन्य सभी चीजें फीकी लगने लगती हैं। खाटू धाम जाकर भक्त ने जो आध्यात्मिक आनंद और शांति प्राप्त की, वह उसके मन में इतनी गहराई से बस गई कि अब उसे अपने घर और संसार में मन नहीं लगता। वह हर समय बाबा को याद करता है और पुनः उनके दर्शन पाने की इच्छा रखता है। भजन यह भी दर्शाता है कि भगवान का प्रेम एक ऐसा आकर्षण है, जो भक्त को बार-बार अपनी ओर खींचता है। फागुन मेले का वर्णन भक्त की उस तड़प को और अधिक गहरा बनाता है, जहां वह बाबा के संग बिताए पलों को याद कर भावुक हो जाता है। अंततः यह भजन सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें भक्त का मन हर समय भगवान के चरणों में ही लगा रहे।