Shree Venkateswara Stotram

श्री वेंकटेश्वर स्तोत्रम् - Shree Venkateswara Stotram
Bhajans

श्री वेंकटेश्वर स्तोत्रम् - Shree Venkateswara Stotram

परिचय यह दिव्य स्तोत्र भगवान (श्री वेङ्कटेश / बालाजी) की स्तुति में रचित है। इसमें भगवान को वेङ्कटशैलपति, वृषशैलपति, कमलादयित (लक्ष्मीपति), रघुराम, दाशरथि तथा वसुदेवसुत जैसे विभिन्न विष्णु अवतारों के रूप में वंदित किया गया है। यह स्तोत्र भक्त की पूर्ण शरणागति को व्यक्त करता है। भक्त अपने अनेक अपराधों को स्वीकार कर प्रभु से क्षमा और कृपा की याचना करता है तथा उनके चरणों की सेवा को ही जीवन का परम फल मानता है। भावार्थ स्तोत्र में भगवान वेङ्कटेश को समस्त देवताओं के मुकुटमणि, शरणागतवत्सल और कृपानिधान कहा गया है। भक्त स्वीकार करता है कि उसने अज्ञानवश अनेक अपराध किए हैं, अतः प्रभु अपनी करुणा से उसे क्षमा करें। अंत में वह दृढ़ संकल्प व्यक्त करता है कि वेङ्कटेश के अतिरिक्त वह किसी अन्य देव को नहीं भजेगा और सदैव उनके चरणों का स्मरण करेगा। पाठ का फल शरणागति और भक्ति की दृढ़ता पाप और अपराधों की क्षमा मानसिक शांति और आत्मिक संतोष श्री हरि की विशेष कृपा की प्राप्ति