श्री मारुती स्तोत्र - Shree Maruti Stotram
परिचय
भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र श्रीहनुमानजी की महिमा का अत्यंत प्रभावशाली स्तवन है। इसमें हनुमानजी के रौद्र, वीर, तेजस्वी और करुणामय स्वरूप का वर्णन किया गया है। वे अंजनी के पुत्र, पवनसुत, श्रीराम के दूत और भक्तों के संकटहर्ता हैं। इस स्तोत्र में उनके अद्भुत पराक्रम, अपार बल, वेग, तेज और दुष्टों के संहारक रूप का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसका पाठ करने से भय, रोग, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं तथा मन में साहस और आत्मबल की वृद्धि होती है।
भावार्थ
इस स्तोत्र में हनुमानजी को भीमरूपी, महारुद्र, वज्रसमान बलशाली और प्राणदाता कहा गया है। वे दीनों के नाथ, भक्तों के रक्षक और श्रीराम के परम सेवक हैं। उनका स्वरूप इतना विशाल और तेजस्वी है कि देवता भी विस्मित हो जाते हैं। वे अणु से भी सूक्ष्म और ब्रह्मांड से भी विशाल हो सकते हैं। उनके दर्शन से भूत-प्रेत, रोग-व्याधि, भय और चिंताएँ नष्ट हो जाती हैं। यह स्तोत्र उनके अद्वितीय बल, वेग और भक्तवत्सल स्वभाव का गुणगान करता है।