जादू करके - Jaadu Karke
परिचय
यह अत्यंत मधुर और प्रेमरस से परिपूर्ण मीरा भजन भगवान श्रीकृष्ण की मोहिनी छवि और उनके दिव्य प्रेम के प्रभाव का सुंदर वर्णन करता है। इस भजन में भक्त श्रीकृष्ण को ऐसा जादूगर कहता है, जिन्होंने अपनी मुस्कान, मुरली, रूप और प्रेम से भक्त के हृदय को पूरी तरह मोहित कर लिया है।
भजन में श्रीकृष्ण के मोर मुकुट, पीताम्बर और नटवर रूप की मनोहारी छवि का वर्णन किया गया है। भक्त अनुभव करता है कि श्रीकृष्ण अपने प्रेम का जादू करके उसके हृदय में बस गए हैं और अब उनके बिना जीवन अधूरा लगता है।
इस भजन में मीरा बाई की निष्काम भक्ति और पूर्ण समर्पण का भी सुंदर चित्रण है। मीरा स्वयं को श्रीगिरधर नागर की दासी मानकर उनके चरणों में अपना चित्त अर्पित कर देती हैं।
भावार्थ
इस भजन में भक्त कहता है कि श्रीकृष्ण ने अपने प्रेम और मधुर रूप से ऐसा जादू किया कि उसका मन पूरी तरह उनके प्रेम में डूब गया। नन्दनंदन श्रीकृष्ण अपने प्रेम का प्रभाव छोड़कर मानो चुपचाप हृदय को चुरा ले गए।
भक्त श्रीकृष्ण के मोर मुकुट और पीताम्बर धारण किए हुए सुंदर स्वरूप के दर्शन की लालसा व्यक्त करता है। वह बार-बार प्रभु से मिलने की इच्छा करता है और उनके विरह में व्याकुल रहता है।
अंत में मीरा बाई कहती हैं कि उन्होंने श्रीगिरधर नागर के चरण कमलों में अपना मन समर्पित कर दिया है। यही सच्ची भक्ति और आत्मिक प्रेम इस भजन का मुख्य संदेश है।