नवीनतम भजन - Latest Bhajans
यहाँ आपको सभी श्रेणियों के नवीनतम प्रकाशित भजन मिलेंगे —राम, हनुमान, शिव, कृष्ण, माता रानी और अन्य।
इन भजनों के पूरे बोल (Lyrics), विवरण और PDF डाउनलोड सुविधा के साथ उपलब्ध हैं।
श्रीगणेश संकटनाशन स्तोत्रम् - Shree Ganesh Sankat Nashan Stotaram
परिचय यह पवित्र स्तोत्र भगवान गणेश के द्वादश (बारह) दिव्य नामों का स्मरण कराता है। इसमें गणेशजी को वक्रतुण्ड, एकदन्त, लम्बोदर, विघ्नराज, भालचन्द्र, गजानन आदि नामों से वंदित किया गया है। यह स्तोत्र प्रातः, मध्यान्ह और सायं — त्रिसंध्या में पाठ करने योग्य बताया गया है। इसके नियमित जप से विघ्नों का नाश होता है तथा आयु, विद्या, धन और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भावार्थ इस स्तोत्र में बताया गया है कि जो मनुष्य श्रद्धा से इन बारह नामों का नित्य स्मरण करता है, उसके जीवन से विघ्न और भय दूर हो जाते हैं। विद्यार्थी को विद्या, धन चाहने वाले को धन, संतान की इच्छा रखने वाले को संतान तथा मोक्ष चाहने वाले को उत्तम गति प्राप्त होती है। अंत में कहा गया है कि जो इस स्तोत्र को लिखकर ब्राह्मणों को अर्पित करता है, उसे भगवान गणेश की कृपा से सर्वविद्या की प्राप्ति होती है। पाठ का फल विघ्नों और बाधाओं का नाश विद्या, धन और संतान की प्राप्ति मनोकामनाओं की सिद्धि भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्ति
श्री बिमला देवी अष्टकम - Shree Bimala Devi Ashtakam
परिचय श्री बिमला देवी अष्टकम देवी विमला की स्तुति है, जो जगन्नाथ धाम की अधिष्ठात्री शक्ति मानी जाती हैं। वे आदिशक्ति, त्रिपुरा, महेश्वरी तथा करुणामयी माता के रूप में भक्तों की रक्षा करती हैं। यह अष्टकम उनकी कृपा, संरक्षण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पाठ किया जाता है। भावार्थ इस अष्टकम में देवी विमला को समस्त मंगलों की दात्री, दारिद्र्य और भय का नाश करने वाली, ज्ञान और शांति प्रदान करने वाली बताया गया है। वे भक्तों के दुःखों को दूर कर सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक कल्याण देती हैं। जो भक्त श्रद्धा से उनका स्मरण करता है, उसे देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। फल इस अष्टकम का श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से दारिद्र्य, भय और संकटों का नाश होता है। भक्त को ज्ञान, शांति, धर्म, श्रद्धा और समृद्धि प्राप्त होती है।
श्री शिवनामावल्यष्टकम् - Shree Shiv Naamavali Astakam
परिचय श्री शिवनामावल्य अष्टकम् भगवान शिव के अनेक दिव्य नामों का स्तवन है। इसमें शिव के विभिन्न स्वरूपों — चन्द्रचूड़, नीलकण्ठ, विश्वनाथ, पशुपति, मृत्युंजय आदि — का स्मरण करते हुए संसार रूपी दुःख से रक्षा की प्रार्थना की गई है। यह स्तोत्र विशेष रूप से भय, संकट और दारिद्र्य निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। भावार्थ इस अष्टकम में भक्त भगवान शिव के विभिन्न नामों का उच्चारण करते हुए उनसे प्रार्थना करता है कि वे संसार के दुःख, भय और क्लेश से उसकी रक्षा करें। शिव को करुणामय, दीनबन्धु, त्रिनेत्रधारी, कैलासवासी और गंगाधर रूप में वर्णित किया गया है। वे शरणागतों की रक्षा करने वाले और दारिद्र्य व दुःख को नष्ट करने वाले हैं। फल जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस शिवनामावल्य अष्टकम् का नित्य पाठ करता है, उसके जीवन के कष्ट, भय और बाधाएँ दूर होती हैं। उसे मानसिक शांति, साहस और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
मोरे संकट के कटैया - More Sankat Ke Kataiya
परिचय यह भक्तिमय भजन श्री हनुमान जी की महिमा का वर्णन करता है। इसमें भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि वे उसके सभी दुख और संकट दूर करें। श्री हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते हैं और उन्हें साहस, शक्ति और रक्षा प्रदान करते हैं। भावार्थ इस भजन में भक्त श्री हनुमान जी से विनती करता है कि वे उसके जीवन के सभी संकटों को दूर करें। हनुमान जी अंजनी पुत्र और केसरी नंदन हैं, जिनके हृदय में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण सदैव विराजमान रहते हैं। उन्होंने रामभक्त होकर अनेक दानवों का संहार किया और भगवान राम के कार्यों को पूर्ण किया। जैसे उन्होंने लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, वैसे ही वे अपने भक्तों के सभी दुख-कष्ट दूर करके उनकी रक्षा करते हैं।
श्री गणेशपञ्चरत्नम् - Shree Ganesh Panchratnam
परिचय श्री गणेश पञ्चरत्न स्तोत्र भगवान श्रीगणेश की महिमा का अत्यंत प्रसिद्ध और मंगलमय स्तवन है। इसमें गणपति को विघ्नों का नाश करने वाला, बुद्धि और सिद्धि देने वाला तथा समस्त लोकों का रक्षक बताया गया है। यह स्तोत्र पाँच मुख्य श्लोकों में गणेशजी के स्वरूप, गुण, करुणा और दिव्य प्रभाव का वर्णन करता है। श्रद्धा और भक्ति से इसका पाठ करने पर जीवन के विघ्न दूर होते हैं और कार्य सिद्ध होते हैं। भावार्थ इस स्तोत्र में श्रीगणेश को मोदकप्रिय, एकदन्त, गजमुख और करुणामय कहा गया है। वे दैत्यों का विनाश करने वाले, भक्तों के संकट हरने वाले और बुद्धि के दाता हैं। गणेशजी को योगियों के हृदय में निवास करने वाला तथा परम तत्त्व का स्वरूप बताया गया है। उनका स्मरण करने से भय, रोग, दोष और बाधाएँ नष्ट होती हैं तथा जीवन में यश, आरोग्य और समृद्धि प्राप्त होती है।
लिङ्गाष्टकम् - Lingashtakam
परिचय “लिङ्गाष्टकम्” भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसमें शिवलिंग के दिव्य स्वरूप, उसकी पवित्रता और भक्तों के कल्याणकारी प्रभाव का गुणगान किया गया है। यह स्तोत्र विशेष रूप से शिवरात्रि, श्रावण मास, प्रदोष व्रत तथा दैनिक शिव पूजन में श्रद्धा से पाठ किया जाता है। भावार्थ इस स्तोत्र में शिवलिंग को सृष्टि का कारण, पापों का नाश करने वाला, बुद्धि और कल्याण प्रदान करने वाला बताया गया है। प्रत्येक श्लोक में शिवलिंग के विभिन्न दिव्य गुणों का वर्णन है — जैसे ब्रह्मा और विष्णु द्वारा पूजित, रावण के अहंकार का विनाश करने वाला, दक्ष यज्ञ का संहारक और भक्तों के कष्टों का हरण करने वाला। अंत में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से शिव के समीप बैठकर इस लिङ्गाष्टकम् का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और भगवान शिव के साथ आनंदित होता है। पाठ का फल जो श्रद्धा और भक्ति से लिङ्गाष्टकम् का नियमित पाठ करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं, दरिद्रता दूर होती है और अंततः शिव कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्री वैद्यनाथ अष्टकम - Shree Vaidyanath Ashtakam
परिचय श्री वैद्यनाथ अष्टकम भगवान शिव के वैद्यनाथ स्वरूप की स्तुति है। इसमें शिव को समस्त रोगों के नाशक, करुणामय, त्रिलोचन, त्रिपुरान्तक तथा भक्तप्रिय बताया गया है। यह अष्टकम विशेष रूप से शारीरिक एवं मानसिक रोगों से मुक्ति और आयु, आरोग्य एवं सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पाठ किया जाता है। भावार्थ इस अष्टकम में भगवान शिव के उस स्वरूप का वर्णन है जो संसार रूपी भवरोग के वैद्य हैं। वे गंगाधर, नीलकण्ठ, त्रिनेत्रधारी और त्रिपुरासुर के संहारक हैं। वे दुष्टों का नाश करने वाले तथा भक्तों पर कृपा करने वाले हैं। वे समस्त रोगों का नाश करते हैं और अंध, बहरे, लंगड़े अथवा रोगग्रस्त प्राणियों को भी सुख प्रदान करते हैं। जो उनके शरण में आता है, उसे आरोग्य, संतति, सौभाग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम - Shree Ganesh Raksha Stotram
परिचय यह दिव्य स्तुति भगवान गणेश की महिमा का गान करती है। इसमें उन्हें विघ्नों के नाशक, मोक्ष के साधक, कृपा और क्षमा के सागर, तथा समस्त लोकों के मंगलकर्ता के रूप में वंदित किया गया है। इस स्तुति में गणेशजी के एकदन्त, गजानन, विनायक और महागणेश स्वरूपों का ध्यान कर भक्त उनके चरणों में शरण ग्रहण करता है। भावार्थ भक्त भगवान गणेश को प्रणाम करते हुए उनसे प्रार्थना करता है कि वे उसके विघ्न, पाप और संकटों का नाश करें। जो साधक प्रतिदिन श्रद्धा से इस स्तुति का पाठ करता है, उसे आरोग्य, दोषरहित जीवन, उत्तम संतति और आयु की प्राप्ति होती है। भगवान एकदन्त योगियों के हृदय में सदा विराजमान रहते हैं और अपने भक्तों के सभी विघ्न दूर करते हैं। पाठ का फल समस्त विघ्नों का नाश आरोग्य और आयु की वृद्धि मनोकामनाओं की पूर्ति सुख, समृद्धि और सद्बुद्धि की प्राप्ति
तेरी शरण में आके मैं धन्य हो गया - Teri Sharan Me Aake Me Dhanya Ho Gaya
परिचय यह भजन भगवान की शरणागति और उनकी कृपा के महत्व को दर्शाता है। इसमें भक्त अपने जीवन के अनुभव को व्यक्त करते हुए कहता है कि प्रभु की शरण में आने से उसका जीवन धन्य हो गया। जन्मों से जो आध्यात्मिक प्यास थी, वह प्रभु की कृपा से पूर्ण हो गई। भावार्थ भजन का संदेश यह है कि संसार में धन-दौलत, मान-सम्मान और अनेक प्रकार की वस्तुएँ मिल सकती हैं, परन्तु सच्चा सुख और संतोष केवल भगवान की शरण में ही मिलता है। जब भक्त सच्चे मन से प्रभु को अपना मान लेता है, तब उसके दुख दूर हो जाते हैं और उसे जीवन का सच्चा मार्ग मिल जाता है। प्रभु के चरणों का सहारा ही जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का मार्ग है।
हरि नाम नहीं तो जीना क्या - Hari Naam Nahi Toh Jeena Kya
परिचय यह भजन हरि नाम की महिमा का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि संसार के सभी भोग, आडंबर और बाहरी आभूषण क्षणभंगुर हैं, जबकि हरि का नाम अमृत के समान है। जो व्यक्ति हरि नाम का स्मरण करता है, उसका जीवन सार्थक हो जाता है। भावार्थ भजन का संदेश है कि मनुष्य को हर समय भगवान के नाम का जप करना चाहिए। मृत्यु कब आ जाए यह निश्चित नहीं है, इसलिए जीवन का वास्तविक सार हरि नाम में ही है। तीर्थ, आभूषण और सांसारिक सुख तब तक व्यर्थ हैं जब तक मन और वाणी में भगवान का स्मरण नहीं है।
यशोदा मैया खोल किवडीया लाला आयो - Yashoda Maiya khol kivadiya Lala aayo
परिचय “यशोदा मैया खोल किवड़िया” एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण श्रीकृष्ण भजन है। इसमें बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण के गऊ चराकर घर लौटने का सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन विशेष रूप से जन्माष्टमी, नंदोत्सव, ब्रज कीर्तन और सत्संग में गाया जाता है। भजन में यशोदा मैया का वात्सल्य भाव, गोपियों का प्रेम और श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ अत्यंत सरल और मनोहर शब्दों में प्रस्तुत की गई हैं। भावार्थ इस भजन में श्रीकृष्ण के गऊ चराकर लौटने का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। वे मधुर बंसी बजाते हुए आते हैं, जिसे सुनकर गोपियाँ आनंदित होकर अटारी पर चढ़ जाती हैं। यशोदा मैया आरती उतारती हैं और प्रेम से बलैयाँ लेती हैं। श्रीकृष्ण की बाल सुलभ चंचलता, सखियों से संवाद, गाय दुहने की लीला और माखन की माँग — सब मिलकर उनके स्नेहपूर्ण बाल स्वरूप को दर्शाते हैं। यह भजन वात्सल्य रस और माधुर्य रस का सुंदर संगम है, जो भक्त के हृदय में प्रेम और आनंद भर देता है।
श्री भवानी अष्टकम् - Shree Bhavani Ashtakam
परिचय भवानी अष्टकम् की रचना आदि शंकराचार्य ने की है। यह अष्टकम् माँ भवानी / आदिशक्ति के प्रति पूर्ण शरणागति का भाव प्रकट करता है। साधक स्वीकार करता है कि संसार में कोई भी स्थायी सहारा नहीं है — एकमात्र आश्रय माँ भवानी ही हैं। भावार्थ यह अष्टकम् बताता है कि जब सभी संबंध, ज्ञान, कर्म और साधन असहाय प्रतीत हों, तब भी माँ भवानी जीव की एकमात्र गति हैं। वह हर संकट, भय, पाप और दुःख से रक्षा करने वाली करुणामयी शक्ति हैं। अर्थ (संक्षिप्त व्याख्या) गतिस्त्वं – मेरी एकमात्र शरण भवाब्धि – संसार रूपी सागर कुसंसार पाश – मोह और बंधन शरण्ये – शरण देने वाली आदिशक्ति – समस्त शक्तियों की मूल
श्री गोपीजन वल्लभाष्टकम - Shree Gopijan Vallabhashtakam
परिचय श्री गोपीजनवल्लभ अष्टकम भगवान श्रीकृष्ण के उस मधुर स्वरूप की स्तुति है, जो गोपियों के प्रिय, भक्तों के जीवनाधार और लीला पुरुषोत्तम हैं। इसमें उनके बालरूप, गोपाल लीलाएँ, कंस वध तथा भक्तों पर कृपा का सुंदर वर्णन है। भावार्थ इस अष्टकम में भगवान श्रीकृष्ण के कमलनयन, करुणामय और मधुर हास्ययुक्त स्वरूप का वंदन किया गया है। वे बकासुर और कंस जैसे दैत्यों का संहार करने वाले हैं तथा गोप-बालकों के जीवन के आधार हैं। वे यमुना तट पर क्रीड़ा करने वाले, पीताम्बरधारी, मनोहर किशोर रूपधारी हैं। वे भक्तों के लिए सहज प्राप्त होने वाले और समस्त शुभ लक्षणों से युक्त परम पुरुष हैं। देवकीनन्दन श्रीकृष्ण शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले चतुर्भुज रूप में भी भक्तों की रक्षा करते हैं। फल जो श्रद्धा और भक्ति से इस गोपीजनवल्लभ अष्टकम का नित्य पाठ करता है, उसे भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उसके जीवन में भक्ति, आनंद, प्रेम और आध्यात्मिक उन्नति का विकास होता है।
जीवन है तेरे हवाले मुरलिया वाले - Jivan Hai Tere Hawale Muraliya Wale
परिचय यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम की भावना को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने जीवन को मुरलीधर श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित करते हुए उनसे प्रार्थना करता है कि वे उसे अपने अधीन रखकर अपनी इच्छा अनुसार चलाएं। भावार्थ भजन का भाव यह है कि भक्त स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण के हाथों की कठपुतली और उनकी मुरली के समान मानता है। जैसे मुरली भगवान की इच्छा से ही मधुर धुन बजाती है, वैसे ही भक्त चाहता है कि उसका जीवन भी प्रभु की इच्छा के अनुसार चले। संसार में जब अपने भी पराए हो जाते हैं, तब केवल भगवान ही सच्चे सहारे बनते हैं। इसलिए भक्त उनसे प्रार्थना करता है कि वे उसे अपनाकर अपने चरणों में स्थान दें और वृंदावन में बसने का आशीर्वाद प्रदान करें।
मोहन आवो तो सही - Mohan Aao Toh Sahi
परिचय यह भक्तिमय पद संत शिरोमणि मीराबाई की अनन्य कृष्ण भक्ति को प्रकट करता है। इसमें मीरा जी प्रभु गिरधर गोपाल के विरह में मंदिर में एकाकी खड़ी होकर उन्हें स्नेहपूर्वक पुकारती हैं। यह पद प्रेम, समर्पण और आत्मविस्मृति की चरम अभिव्यक्ति है। भावार्थ इस पद में मीरा बाई प्रभु श्रीकृष्ण के विरह में मंदिर में अकेली खड़ी होकर उन्हें पुकारती हैं। वह कहती हैं कि यदि आप चाहें तो मैं आपके सिर का मुकुट बन जाऊँ, आपकी आँखों का काजल बन जाऊँ, यमुना का जल बन जाऊँ या आपके चरणों की पायल बन जाऊँ। यह भाव पूर्ण समर्पण का प्रतीक है, जहाँ भक्त स्वयं का अस्तित्व मिटाकर केवल प्रभु में ही रम जाना चाहता है। मीरा का प्रेम निष्काम, निर्मल और पूर्ण आत्मार्पण से युक्त है।
बालाजी अच्छा लागे से - Balaji Achha Lage Se
परिचय यह भजन भगवान हनुमान जी की महिमा और उनके प्रति भक्तों की गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। इसमें हनुमान जी को श्रीराम के परम सेवक और दूत के रूप में स्मरण किया गया है। भजन में सालासर बालाजी के दरबार की महिमा, माता अंजनी के लाल हनुमान जी की शक्ति और उनके प्रति भक्तों के प्रेम का सुंदर वर्णन मिलता है। यह भजन भक्तों को हनुमान जी की भक्ति और उनके स्मरण के लिए प्रेरित करता है। भावार्थ इस भजन का अर्थ यह है कि हनुमान जी श्रीराम के सबसे प्रिय भक्त और दूत हैं, जिनके तन और मन में हर समय राम का वास रहता है। भक्त जब उनके दरबार में श्रद्धा के साथ आते हैं, तो उनकी कृपा से जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं। सालासर बालाजी की महिमा का गुणगान करते हुए यह भजन बताता है कि जो भी सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसे सुख, शांति और भक्ति का आनंद प्राप्त होता है।
श्री हनुमान अमृतवाणी - Shree Hanuman Amritwani
परिचय यह विस्तृत भजन भगवान हनुमान जी की महिमा, उनके पराक्रम, भक्ति और श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य निष्ठा का वर्णन करता है। इसमें सुंदरकांड की महिमा, हनुमान जी की भक्ति, उनकी विनम्रता, शक्ति और भक्तों पर उनकी कृपा का विस्तार से वर्णन किया गया है। भावार्थ इस भजन का भाव यह है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान जी केवल बल और वीरता के प्रतीक ही नहीं, बल्कि ज्ञान, सेवा, विनम्रता और सच्ची भक्ति के आदर्श हैं। उनका स्मरण मनुष्य को भय, दुख और अज्ञान से मुक्त कर धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
चले हैं शंकर - Chale Hai Shankar
परिचय “बगड़ बम बम” एक अत्यंत जोशीला और उत्साहपूर्ण शिव भजन है, जिसमें भगवान शिव की बारात का अद्भुत वर्णन किया गया है। इस भजन में शिवजी के अनोखे दूल्हा स्वरूप, उनकी बारात और गौरा माता से विवाह का उल्लासपूर्ण चित्रण मिलता है। यह भजन विशेष रूप से शिवरात्रि, कांवड़ यात्रा, जागरण और शिव कीर्तन में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन में भगवान शिव के विवाह प्रसंग का वर्णन है। वे नंदी पर सवार होकर माता पार्वती (गौरा) से विवाह करने जा रहे हैं। उनके साथ भूत-प्रेत, देवी-देवता और योगीगण बाराती बनकर चल रहे हैंशिवजी का अनोखा श्रृंगार — जटा, गंगा, भस्म, मुंडमाला और त्रिशूल — उनके वैराग्य और दिव्यता को दर्शाता है। भजन में शिव बारात की मस्ती, शंखनाद, डमरू की ध्वनि और अद्भुत उल्लास का वर्णन है। यह भजन बताता है कि भगवान शिव का स्वरूप भले ही विरक्त और अद्भुत हो, परंतु उनका विवाह उत्सव अत्यंत आनंदमय और अलौकिक है।
श्री शिव ताण्डव स्तोत्र - Shree Shiv Tandav Stotram
परिचय शिव ताण्डव स्तोत्र महादेव के तेजस्वी और दिव्य चण्डताण्डव नृत्य का स्तुतिपरक स्तोत्र है। इसे रावण जी ने अत्यंत भक्तिभाव और प्रसन्नता के साथ रचा था। इस स्तोत्र में भगवान शिव के अत्यंत सौम्य और क्रूर रूप दोनों का वर्णन किया गया है – उनके जटाओं में बहती गंगा, गले में लिपटी भुजंगमालाएं, सिर पर विराजमान चन्द्रमा और उनके क्रूर ताण्डव का दृश्य। भावार्थ शिव ताण्डव स्तोत्र में भगवान शिव की महिमा का विस्तार से चित्रण किया गया है। इसमें उनके जटाओं में बहती गंगा, सुशोभित चन्द्रमा, भुजंगमालाएं, प्रखर तेज और उनका चण्डताण्डव नृत्य दर्शाया गया है। हर श्लोक में शिव जी की शक्ति, उनकी दिव्यता, उनके क्रोध और करुणा का संतुलन देखने को मिलता है। पाठ का फल इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से: मानसिक और शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है। जीवन में आने वाले संकट, भय और अवरोध दूर होते हैं। ध्यान और एकाग्रता की क्षमता बढ़ती है। भक्त को आध्यात्मिक शांति और आंतरिक उत्साह प्राप्त होता है। जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस और दृढ़ता का संचार होता है।
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे - Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare
परिचय यह अत्यंत करुणामय भक्ति पद है जिसमें भक्त भगवान से विनम्र प्रार्थना करता है कि वे उसके दोषों और अवगुणों को न देखें। भक्त स्वीकार करता है कि वह त्रुटियों से भरा हुआ है, किंतु प्रभु की कृपा ही उसे संसार रूपी सागर से पार लगा सकती है। इस पद में भगवान की करुणा, क्षमा और शरणागति का भाव अत्यंत मार्मिक रूप से प्रकट होता है। भावार्थ इस पद में भक्त भगवान से विनती करता है कि यदि आप हमारे दोषों को ही देखते रहेंगे तो हम संसार रूपी भवसागर से कैसे पार हो पाएंगे। भक्त याद दिलाता है कि आपने पहले भी गणिका और अजामिल जैसे पतितों का उद्धार किया है। भक्त स्वीकार करता है कि वह अपवित्र, कुटिल और दोषों से भरा हुआ है, फिर भी वह स्वयं को प्रभु का ही मानता है। इसलिए वह भगवान से प्रार्थना करता है कि वे अपनी करुणा से उसे भी शरण देकर उसका उद्धार करें।