नवीनतम भजन - Latest Bhajans
यहाँ आपको सभी श्रेणियों के नवीनतम प्रकाशित भजन मिलेंगे —राम, हनुमान, शिव, कृष्ण, माता रानी और अन्य।
इन भजनों के पूरे बोल (Lyrics), विवरण और PDF डाउनलोड सुविधा के साथ उपलब्ध हैं।
आये तेरे भवन - Aaye Tere Bhawan
परिचय “आये तेरे भवन, देदे अपनी शरण” एक अत्यंत प्रसिद्ध और भावपूर्ण माता भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता के चरणों में शरण मांगता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जगराते और भक्ति समारोहों में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन में भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वह उसे अपनी शरण में स्थान दें और उसकी भक्ति की ज्योति हमेशा जलती रहे। भजन में प्रकृति और सृष्टि के माध्यम से माता की महिमा का वर्णन किया गया है, जहाँ हर तत्व माता की आराधना में लीन दिखाई देता है।
जग दाती पहाड़ों वाली मां - Jagdaati Pahadonwali Maa
परिचय “जग दाती पहाड़ों वाली मां” एक अत्यंत भावुक भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता से अपने दुखों को दूर करने और जीवन की बिगड़ी परिस्थितियों को सुधारने की प्रार्थना करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और जगराते में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन में भक्त अपनी कमजोरी, गरीबी और दुखों को व्यक्त करते हुए माता से सहायता की गुहार लगाता है। वह मानता है कि माता ही उसकी नैया को पार लगा सकती हैं और उसकी लाज बचा सकती हैं, इसलिए वह पूरे विश्वास के साथ माता को पुकारता है।
बिगड़ी मेरी बना दे - Bigdi Meri Bana De
परिचय “बिगड़ी मेरी बना दे ए शेरों वाली मैया” एक करुणा और विनती से भरा भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता से अपनी बिगड़ी किस्मत सुधारने की प्रार्थना करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और जगराते में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन में भक्त अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए माता से क्षमा और कृपा की याचना करता है। वह कहता है कि माता हर संकट से उबारने वाली हैं, इसलिए उसे भी अपने चरणों में स्थान देकर उसकी जीवन-नैया पार लगाएं।
मन की मुरादें पूरी कर माँ - Man Ki Muraden Poori Kar Maa
परिचय “मन की मुरादें पूरी कर माँ” एक अत्यंत श्रद्धामय भजन है, जिसमें भक्त माता दुर्गा माता के चरणों में अपनी प्रार्थना और विश्वास व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त माता से अपनी इच्छाओं की पूर्ति, जीवन के कष्टों से मुक्ति और कृपा की याचना करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जगराते और माता के दरबार में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन का मुख्य भाव है पूर्ण समर्पण और विश्वास। भक्त कहता है कि वह माता के दर्शन के लिए अवश्य आएगा और अपनी भक्ति के रूप में भोग, सेवा और श्रद्धा अर्पित करेगा। यह भजन दर्शाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती और माता अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं।
किशोरी मोहे अपनो कर लिजो - Kishori Mohe Apno Kar Lijo
परिचय यह भजन श्री राधा रानी की करुणा और कृपा का भावपूर्ण वर्णन करता है। इसमें भक्त राधारानी से प्रार्थना करता है कि वे उसे संसार के मोह और जंजाल से मुक्त करके अपने धाम बरसाना में स्थान दें। यह भजन राधा रानी के चरणों में पूर्ण समर्पण और सेवा की भावना को प्रकट करता है। भावार्थ भजन का भाव यह है कि भक्त संसार की उलझनों से मुक्त होकर केवल राधा रानी की सेवा और भक्ति में जीवन बिताना चाहता है। वह प्रार्थना करता है कि उसे बरसाना में रहने का अवसर मिले, जहाँ वह प्रतिदिन राधा रानी के दर्शन करे, भक्तों की सेवा करे और उनके चरणों की धूलि को अपने सिर पर धारण करे। इस प्रकार उसका जीवन सफल और धन्य हो जाए।
प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी - Pyara Saja Hai Tera Dwar Bhawani
परिचय “बड़ा प्यारा सजा है द्वार भवानी” एक मधुर और श्रद्धा से भरा भजन है, जो माता दुर्गा माता के दरबार की महिमा का वर्णन करता है। इस भजन में भक्त माता के सजे हुए द्वार, उनकी कृपा और दया का गुणगान करते हैं। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और जागरण में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन में बताया गया है कि माता का दरबार सबसे निराला और कृपा से भरा है। भक्तों की लंबी कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि जो भी सच्चे मन से माता के द्वार आता है, उसकी झोली भर जाती है। यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के सामने सच्ची नीयत और श्रद्धा ही सबसे महत्वपूर्ण है।
श्री दुर्गा अमृतवाणी - Shree Durga Amritwani
परिचय “श्री दुर्गा अमृतवाणी” एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तुति है, जो माता दुर्गा माता की महिमा, शक्ति और करुणा का विस्तृत वर्णन करती है। यह अमृतवाणी विभिन्न रूपों में देवी की स्तुति करते हुए उनके अनंत स्वरूप, कृपा और भक्तों के प्रति प्रेम को दर्शाती है। इसे विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण और दैनिक पाठ में श्रद्धा के साथ गाया या पढ़ा जाता है। भावार्थ श्री दुर्गा अमृतवाणी का मुख्य भाव यह है कि माता ही इस सृष्टि की मूल शक्ति हैं और वही हर जीव का पालन, संरक्षण और उद्धार करती हैं। इसमें बताया गया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता का स्मरण करता है, उसके सभी दुःख दूर होते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह अमृतवाणी यह भी सिखाती है कि जीवन में सच्ची श्रद्धा, विश्वास और भक्ति से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
घनश्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है - Ghanshyam Teri Bansi Pagal Kar Jati Hai
घनश्याम की मधुर बंसी और मोहन की मनमोहक मुस्कान हर भक्त के हृदय को भक्ति से भर देती है। यह भजन श्रीकृष्ण की मुरली, उनकी लीलाओं और दिव्य प्रेम का सुंदर वर्णन करता है। जब घनश्याम बंसी बजाते हैं, तो पूरी दुनिया भाव-विभोर होकर नाच उठती है। यह भजन मन को शांति, आनंद और कृष्ण-भक्ति में लीन कर देता है।
हे लाड़ली सुध लीजे हमारी - Hey Ladli Sudh Lije Hamari
परिचय यह भजन श्री राधा रानी की करुणा, कृपा और दयालुता का भावपूर्ण वर्णन करता है। भक्त इस भजन के माध्यम से राधा रानी से अपनी सुध लेने और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने की प्रार्थना करता है। इसमें राधा रानी को दीन-हीनों की रक्षक और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली बताया गया है। भावार्थ भक्त इस भजन में विनम्रता से राधा रानी से निवेदन करता है कि वे उस पर अपनी कृपा दृष्टि रखें। वह स्वयं को दीन और असहाय मानकर राधा रानी को ही अपना सहारा बताता है। इस भजन का संदेश है कि सच्चे मन से की गई भक्ति और प्रार्थना से राधा रानी अपने भक्तों की हर विघ्न और पीड़ा दूर कर देती हैं।
ब्रज में रतन राधिका गोरी - Braj Mai Ratan Radhika Gori
परिचय यह सुंदर भजन श्री राधा रानी की अनुपम सुंदरता और उनकी ब्रज में सर्वोच्च महिमा का वर्णन करता है। इसमें राधिका जी को ब्रज की अनमोल रत्न के रूप में बताया गया है, जिनकी छवि और सौंदर्य सभी को मोहित कर लेता है। यह भजन राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं और ब्रज की मधुर भक्ति परंपरा को दर्शाता है। भावार्थ इस भजन में राधा रानी के रूप, सौंदर्य और उनकी दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया है। भक्त कहता है कि राधिका जी ब्रज की सबसे अनमोल रत्न हैं, जिनकी शोभा और माधुर्य अद्भुत है। वे श्रीकृष्ण के साथ कुंज और निकुंज में विहार करती हैं और उनकी जोड़ी मेघ और बिजली के समान सुंदर लगती है। यह भजन भक्त के हृदय में राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति को जागृत करता है।
माई - Maai
परिचय “हो माई री” एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है, जो माता दुर्गा माता की असीम ममता और करुणा का गुणगान करता है। इस भजन में एक भक्त अपने आप को मां का बालक मानकर उनके प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम व्यक्त करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और जागरण में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन का मूल भाव मां और भक्त के अटूट संबंध को दर्शाना है। भक्त कहता है कि मां ने उसे बिना मांगे सब कुछ दिया, जीवन जीने की राह दिखाई और हर कठिनाई में उसका साथ दिया। यह भजन हमें यह सिखाता है कि मां की ममता सबसे बड़ी शक्ति है और जो उनके चरणों में समर्पित हो जाता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।
सोहणा दरबार - Sohna Darbaar
परिचय “सोहणा सजा है तेरा द्वारा” एक अत्यंत लोकप्रिय और भक्तिमय भजन है, जो माता दुर्गा माता के “शेरांवाली” स्वरूप की महिमा का वर्णन करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता के दरबार में गाया जाता है, जहाँ भक्त माता के सजे हुए दरबार और उनकी कृपा का गुणगान करते हैं। भावार्थ इस भजन में भक्त अपने दुख, पीड़ा और जीवन की कठिनाइयों को माता के चरणों में अर्पित करता है। वह मानता है कि संसार स्वार्थी है, परंतु मां ही एकमात्र ऐसी शक्ति हैं जो सच्चे मन से पुकारने पर हर किसी की सहायता करती हैं। भजन का मुख्य संदेश है कि माता के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
फूलों में सज रहे हैं श्री वृन्दावन बिहारी - Phoolon Mein Saj Rahe Hain Shree Vrindavan Bihari
भजन में बताया गया है कि राधा-कृष्ण फूलों से सजे हुए अत्यंत मनमोहक रूप में विराजमान हैं। उनकी मधुर मुस्कान, करुणा भरी दृष्टि और आपसी प्रेम हर भक्त का मन मोह लेते हैं। उनके श्रृंगार, रंग-रूप और दिव्य आभा का वर्णन करते हुए भक्त पूरी तरह उनसे आकर्षित हो जाता है। अंत में भक्त अपनी भक्ति और प्रेम व्यक्त करते हुए कहता है कि वह स्वयं को राधा-कृष्ण और उनकी सेवा करने वालों पर भी न्यौछावर कर देता है। यह भजन श्रीराधा-कृष्ण के अलौकिक श्रृंगार, सौंदर्य और प्रेममय स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करता है। वृन्दावन बिहारी श्रीकृष्ण और वृषभानु नंदिनी श्रीराधा की मधुर छवि, करुणा भरी दृष्टि और युगल प्रेम इस भजन के माध्यम से जीवंत हो उठता है। यह भजन राधा-कृष्ण भक्ति में डूबे भक्तों के हृदय को आनंद और श्रद्धा से भर देता है।
आई है नवरात्रि - Aayi Hai Navratri
परिचय “हे जी मेरी मां की नवरात्रि आई” एक उत्साहपूर्ण और भक्तिमय भजन है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर माता दुर्गा माता की आराधना में गाया जाता है। इस भजन में गरबा, आरती और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ भक्त नृत्य और संगीत के माध्यम से मां की भक्ति में लीन हो जाते हैं। भावार्थ यह भजन दर्शाता है कि नवरात्रि के दिनों में मां के विभिन्न रूपों की पूजा कर भक्त उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। भक्त अपनी पीड़ा, कष्ट और मनोकामनाओं को मां के चरणों में समर्पित करता है और उनसे जीवन को संवारने की प्रार्थना करता है। भजन में उल्लास, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का भाव स्पष्ट रूप से झलकता है।
श्री सरस्वती स्तोत्रम् - Shree Saraswati Stotram
परिचय श्री सरस्वती स्तोत्र माता सरस्वती की महिमा का अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध स्तवन है। माँ सरस्वती को विद्या, वाणी, बुद्धि, कला और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, वीणा और पुस्तक धारण करने वाली तथा हंस वाहन पर विराजमान देवी हैं। इस स्तोत्र में देवी के दिव्य स्वरूप, उनकी करुणा, ज्ञानप्रद शक्ति और जड़ता (अज्ञान) के नाश करने वाली महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। विद्यार्थी, विद्वान, कलाकार और साधक विशेष रूप से इस स्तोत्र का पाठ करते हैं। भावार्थ इस स्तोत्र में देवी सरस्वती को कुंद के फूल, चन्द्रमा और हिम के समान श्वेत व निर्मल बताया गया है। वे वीणा, पुस्तक और अक्षरमाला धारण करती हैं, जो ज्ञान और विद्या का प्रतीक हैं। देवी के अनुग्रह से मनुष्य को बुद्धि, वाणी की शुद्धता, स्मरण शक्ति और आध्यात्मिक प्रकाश प्राप्त होता है। यह स्तोत्र अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर मन में ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न करने की प्रार्थना है।
गीत गोविन्द - Geet Govind
परिचय यह पावन रचना महान भक्त कवि जयदेव द्वारा रचित अमर काव्य ग्रंथ गीत गोविन्द का मंगलाचरण भाग है। इसमें भगवान श्रीहरि के विविध रूपों, लीलाओं तथा अवतारों का अत्यंत मधुर और काव्यमय वर्णन किया गया है। प्रत्येक पद के अंत में “जय जय देव हरे” का गान भक्ति, प्रेम और पूर्ण समर्पण की भावना जागृत करता है। भावार्थ इस मंगलाचरण में कवि भगवान के उस दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हैं जो लक्ष्मीजी के वक्ष पर शोभित हैं, वनमाला और कुण्डल से अलंकृत हैं। वे संसार के दुखों का नाश करने वाले और मुनियों के मन रूपी सरोवर के हंस हैं। वे कालिय नाग का दमन करने वाले, यदुवंश रूपी कमल के सूर्य तथा मधु, मुर और नरकासुर का संहार करने वाले हैं। राम रूप में रावण और दूषण का विनाश कर धर्म की रक्षा की। भगवान के नेत्र निर्मल कमल के समान हैं, वे तीनों लोकों के आधार हैं। अंत में कवि प्रार्थना करते हैं कि हम आपके चरणों में शरणागत हैं, कृपया हमारा कल्याण करें।
हे मुरलीधर छलिया मोहन - Hey Murlidhar Chhaliya Mohan
परिचय यह मधुर भक्ति पद भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और विरह भाव को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने हृदय की स्थिति का वर्णन करता है कि वह श्रीकृष्ण के रूप, गुण और लीलाओं से इतना आकर्षित हो गया है कि अनजाने में ही अपना हृदय उन्हें समर्पित कर बैठा। भावार्थ इस पद में भक्त कहता है कि पहले से ही जीवन में अनेक दुःख थे, किंतु जब से उसने श्रीकृष्ण से प्रेम किया है तब से यह विरह और बढ़ गया है। हृदय कहता है कि प्रभु अत्यंत सुंदर हैं और आँखें उन्हें देखने के लिए व्याकुल हैं, परंतु वे सामने नहीं आते। भक्त उनकी महिमा सुनकर आश्चर्यचकित है और उनसे मिलने की इच्छा रखता है। अंत में वह कहता है कि प्रभु ही राम हैं, वही घनश्याम हैं और वही योगेश्वर हैं। वे कभी धनुष धारण करते हैं तो कभी मुरली बजाते हुए यमुना तट पर अपने भक्तों के बीच विराजमान रहते हैं।
प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी - Prarthna Hai Yahi Hanuman Ji
परिचय यह भजन भगवान हनुमान जी से की गई विनम्र प्रार्थना को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने जीवन के दुखों और कमजोरियों को स्वीकार करते हुए हनुमान जी से कृपा और संरक्षण की याचना करता है। साथ ही वह प्रभु श्रीराम और माता सीता के दर्शन की कामना करता है। भावार्थ भजन का भाव यह है कि मनुष्य अपने कर्मों के कारण दुखों में पड़ता है, परंतु जब वह सच्चे मन से भगवान की शरण लेता है तो उसे मार्ग और सहारा मिल जाता है। भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि वे उसके मन को विषय-वासनाओं से मुक्त करके राम-सीता की भक्ति से भर दें, जिससे उसका जीवन पवित्र और सफल हो सके।
मेरे भोले जी कर दो नज़र - Mere Bhole Ji Kardo Nazar
परिचय “मेरे भोले जी कर दो नज़र” भगवान शिव की भक्ति से ओत-प्रोत एक सुंदर भजन है। इसमें भक्त भोलेनाथ से अपने जीवन पर कृपा दृष्टि रखने की प्रार्थना करता है। भजन में भगवान शिव को जीवन का प्रकाश और दुखों को दूर करने वाला बताया गया है, जिनकी कृपा से भक्त का जीवन सुख और शांति से भर जाता है। भावार्थ इस भजन में भक्त भगवान शिव से विनती करता है कि वे उस पर अपनी कृपा दृष्टि रखें ताकि उसका जीवन हँसी-खुशी बीत सके। भक्त मानता है कि शिव की भक्ति से मोह-माया दूर होती है और हृदय में ज्ञान का प्रकाश प्रकट होता है। जब भगवान भोलेनाथ की कृपा मिलती है तो जीवन की कठिनाइयाँ भी सरल हो जाती हैं और मनुष्य आनंद के साथ अपना जीवन व्यतीत करता है।
शिव अमृतवाणी - Shiv Amritwani
परिचय शिव अमृतवाणी भगवान शिव की महिमा, उनके ज्योतिर्लिंगों की कथा और भक्तों के प्रति उनकी अनंत करुणा का वर्णन करने वाली एक अत्यंत पवित्र स्तुति है। इसमें भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, उनकी लीलाओं तथा बारह ज्योतिर्लिंगों के महत्व का भावपूर्ण वर्णन मिलता है। इस स्तुति के माध्यम से भक्त शिव नाम का स्मरण करते हुए अपने जीवन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं। शिव अमृतवाणी का पाठ मन को पवित्र करता है और भक्त को भगवान शिव के निकट ले जाता है। भावार्थ शिव अमृतवाणी का मुख्य संदेश यह है कि भगवान शिव सर्वव्यापी, करुणामय और अपने भक्तों के दुखों को हरने वाले हैं। जो भक्त श्रद्धा और प्रेम से शिव का स्मरण करता है, उसे जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसमें बारह ज्योतिर्लिंगों की महिमा के माध्यम से बताया गया है कि शिव की आराधना से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और भक्त के जीवन में कल्याण का मार्ग खुलता है।