नवीनतम भजन - Latest Bhajans
यहाँ आपको सभी श्रेणियों के नवीनतम प्रकाशित भजन मिलेंगे —राम, हनुमान, शिव, कृष्ण, माता रानी और अन्य।
इन भजनों के पूरे बोल (Lyrics), विवरण और PDF डाउनलोड सुविधा के साथ उपलब्ध हैं।
मैं बैरागन - Mai Bairagan
परिचय यह भजन श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण वैराग्य और समर्पण की भावना को प्रकट करता है। इसमें एक भक्त या गोपी यह कहती है कि वह संसार के सभी बंधनों को छोड़कर केवल अपने साँवरे श्रीकृष्ण के प्रेम में डूब जाना चाहती है और उसी रूप में रहना चाहती है जिससे उसके प्रिय भगवान प्रसन्न हों। भावार्थ भजन का भाव यह है कि जब किसी भक्त का हृदय भगवान के प्रेम में डूब जाता है, तब संसार के रिश्ते और आकर्षण महत्वहीन लगने लगते हैं। भक्त केवल वही जीवन जीना चाहता है जिससे भगवान प्रसन्न हों। वह अपने वस्त्र, रूप और जीवन को भी प्रभु की इच्छा के अनुसार बदलने को तैयार रहता है। यह भजन भक्ति, प्रेम और वैराग्य की गहरी भावना को दर्शाता है।
चन्द्र किरण सा श्याम सलोना - Chandra Kiran Sa Shyam Salona
परिचय यह भजन श्री राधा-कृष्ण की दिव्य रासलीला का सुंदर वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि वृन्दावन में यमुना तट पर भगवान श्रीकृष्ण अपनी मुरली की मधुर धुन पर गोपियों के साथ महारास रचाते हैं। इस दिव्य नृत्य में राधा-कृष्ण और समस्त गोपीजन आनंद और प्रेम में डूबकर नृत्य करते हैं। भावार्थ भजन का भाव यह है कि जब श्रीकृष्ण की मुरली बजती है, तो पूरा ब्रज आनंद और प्रेम में झूम उठता है। स्वयं भगवान शिव भी गोपी का रूप धारण करके इस दिव्य रास में सम्मिलित होते हैं और गोपेश्वर महादेव कहलाते हैं। यह रासलीला केवल नृत्य नहीं, बल्कि परम प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, जिसमें भक्त और भगवान का मिलन होता है।
मेरे बाँके बिहारी - Mere Banke Bihari
परिचय यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप बाँके बिहारी जी के प्रति प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने मन की भावनाओं को प्रकट करते हुए कहता है कि प्रभु के बिना उसका जीवन अधूरा है और उनकी उपस्थिति से ही जीवन में सच्चा सुख और पूर्णता आती है। भावार्थ भजन का भाव यह है कि भक्त अपने तन-मन और जीवन को भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर देता है। वह कहता है कि यदि प्रभु साथ हैं तो सब कुछ है, अन्यथा संसार की कोई भी वस्तु सुख नहीं दे सकती। भक्त प्रभु के सुंदर स्वरूप का स्मरण करते हुए उनसे सदा अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखने की प्रार्थना करता है।
सारे जग में हुकुम चले - Sare Jag Me Hukum Chale
परिचय “सारे जग में हुकुम चले” एक लोकप्रिय देवी भक्ति भजन है, जो माता रानी की महिमा और उनके सर्वशक्तिमान स्वरूप का गुणगान करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, माता की चौकी और जागरण में गाया जाता है। इसमें माँ वैष्णो, अम्बे, दुर्गा और काली के रूपों का स्मरण करते हुए उनकी सार्वभौमिक शक्ति का वर्णन किया गया है। भावार्थ इस भजन में बताया गया है कि पूरे संसार में माता रानी का ही शासन चलता है। प्रकृति के हर कण में, गाँव की हर गली में और भक्तों के हर हृदय में माँ का वास है। लोग उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारते हैं, लेकिन शक्ति एक ही है। माँ अपने भक्तों के दुख और कष्ट सहन नहीं कर पातीं। जब भी कोई संकट आता है, माता अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्टों का नाश करती हैं। यह भजन माँ के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का भाव प्रकट करता है।
ये चोला मां तेरा चोला - Ye Chola Maa Tera Chola
परिचय “ये चोला मां तेरा चोला” एक लोकप्रिय देवी भक्ति भजन है, जो माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी और माँ भवानी के दिव्य स्वरूप का गुणगान करता है। इस भजन में भक्त माँ की ज्योति, कृपा, दरबार और भंडारे की महिमा का वर्णन करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण और माता के भंडारे में गाया जाता है। भजन का भावार्थ इस भजन में भक्त माँ के तेज की तुलना सोने-चांदी और आकाश के चमकते तारों से करता है। वह कहता है कि संसार में कोई भी ऐसा नहीं चमक सकता जैसा माँ का लशकारा (तेज) चमकता है। “ऊंचे ऊंचे पर्वतों तले, ओ माई तेरी ज्योत जले” पंक्ति से संकेत मिलता है कि माँ की ज्योति हर स्थान पर प्रज्वलित है, विशेषकर पर्वतीय धामों में, जहाँ भक्त श्रद्धा से दर्शन करने जाते हैं। भक्त स्वयं को टूटा हुआ सितारा और बेसहारा बताता है, और स्वीकार करता है कि उसके जीवन का सहारा केवल माँ ही हैं। वह कहता है कि सच्ची अमीरी धन में नहीं, बल्कि माँ की कृपा में है। भजन में यह भी व्यक्त किया गया है कि संसार के सभी तीर्थ पुण्य देने वाले हैं, परन्तु माँ का दरबार सबसे पावन है। माँ को “मेहरा वाली” कहा गया है, अर्थात वह जो दया और कृपा की वर्षा करती हैं। आध्यात्मिक संदेश सच्ची संपत्ति माँ की कृपा है। माँ का दरबार सबके लिए खुला है। जो भी श्रद्धा से आता है, खाली नहीं लौटता। निराश और दुखी व्यक्ति को माँ आश्रय देती हैं। पाठ का फल इस भजन को श्रद्धा से गाने या सुनने से मन में भक्ति और विश्वास बढ़ता है। जीवन के कष्टों में मानसिक शक्ति मिलती है। नकारात्मकता दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। माँ की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
श्री वेंकटेश्वर स्तोत्रम् - Shree Venkateswara Stotram
परिचय यह दिव्य स्तोत्र भगवान (श्री वेङ्कटेश / बालाजी) की स्तुति में रचित है। इसमें भगवान को वेङ्कटशैलपति, वृषशैलपति, कमलादयित (लक्ष्मीपति), रघुराम, दाशरथि तथा वसुदेवसुत जैसे विभिन्न विष्णु अवतारों के रूप में वंदित किया गया है। यह स्तोत्र भक्त की पूर्ण शरणागति को व्यक्त करता है। भक्त अपने अनेक अपराधों को स्वीकार कर प्रभु से क्षमा और कृपा की याचना करता है तथा उनके चरणों की सेवा को ही जीवन का परम फल मानता है। भावार्थ स्तोत्र में भगवान वेङ्कटेश को समस्त देवताओं के मुकुटमणि, शरणागतवत्सल और कृपानिधान कहा गया है। भक्त स्वीकार करता है कि उसने अज्ञानवश अनेक अपराध किए हैं, अतः प्रभु अपनी करुणा से उसे क्षमा करें। अंत में वह दृढ़ संकल्प व्यक्त करता है कि वेङ्कटेश के अतिरिक्त वह किसी अन्य देव को नहीं भजेगा और सदैव उनके चरणों का स्मरण करेगा। पाठ का फल शरणागति और भक्ति की दृढ़ता पाप और अपराधों की क्षमा मानसिक शांति और आत्मिक संतोष श्री हरि की विशेष कृपा की प्राप्ति
मेरे साथ मेरी माई है ना - Mere Sath Meri Maai Hai Na
परिचय “मेरे साथ मेरी माई है ना” एक अत्यंत भावपूर्ण देवी भजन है, जिसमें भक्त माँ दुर्गा, गिरजा, कात्यायनी और नारायणी स्वरूप की स्तुति करता है। यह भजन माँ की ममता, करुणा और अटूट संरक्षण की भावना को दर्शाता है। इसमें यह विश्वास प्रकट किया गया है कि यदि माँ साथ हैं तो संसार का कोई भी दुख बड़ा नहीं है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा और माता जागरण में गाया जाता है। भजन का भावार्थ इस भजन में भक्त कहता है कि चाहे जीवन में कितनी भी बाधाएँ आएँ, यदि माँ का आशीर्वाद माथे पर है तो कोई भय नहीं। “जब जब मैं रोया माई, तेरा आँचल भींगा है” पंक्ति माँ की संवेदनशीलता और वात्सल्य को दर्शाती है — माँ अपने बच्चे के दुख को स्वयं महसूस करती है। भक्त संसार को “कागज की नाव” बताता है, अर्थात यह दुनिया अस्थायी और अस्थिर है। सच्चा सहारा केवल माँ की कृपा है। भजन में यह भी विश्वास व्यक्त किया गया है कि ऐसा कोई दुख नहीं जिसे माँ दूर न कर सकें, और ऐसी कोई पीड़ा नहीं जिसका उपचार उनके पास न हो। अंत में देवी के वैदिक स्तुति मंत्र “सर्व मंगल मांगल्ये…” के माध्यम से माँ के विभिन्न दिव्य स्वरूपों का स्मरण किया गया है, जो कल्याण और रक्षा का प्रतीक है। आध्यात्मिक संदेश माँ की शरण में सच्ची सुरक्षा है। संसार अस्थायी है, माँ की कृपा शाश्वत है। सच्चा आत्मविश्वास ईश्वर के भरोसे से आता है। माँ अपने भक्त के दुख को स्वयं महसूस करती हैं। पाठ का फल इस भजन को श्रद्धा से गाने या सुनने से मन में साहस और आत्मबल उत्पन्न होता है। भय, चिंता और निराशा दूर होती है। जीवन में विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माँ की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
गोपी गीत - Gopi Geet
परिचय श्रीकृष्ण गोपीगीत श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कन्ध का अत्यंत मधुर और हृदयस्पर्शी प्रसंग है। रासलीला के समय जब श्रीकृष्ण गोपिकाओं के मध्य से अन्तर्धान हो जाते हैं, तब व्रज की गोपिकाएँ विरह-वेदना से व्याकुल होकर उनका स्मरण करती हुई यह दिव्य गीत गाती हैं। यह केवल स्तुति नहीं, बल्कि आत्मा की परमात्मा के प्रति पुकार है। इस गीत में भक्त और भगवान के बीच की परम प्रेममयी स्थिति का चित्रण है, जहाँ प्रेम में अहंकार नहीं, केवल समर्पण और तड़प है। गोपिकाएँ श्रीकृष्ण को अपना जीवन, प्राण और सर्वस्व मानकर उन्हें पुनः दर्शन देने की विनती करती हैं। भावार्थ इन श्लोकों में गोपिकाएँ श्रीकृष्ण के रूप, माधुर्य, वंशी-नाद, चरणकमलों और उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार का स्मरण करती हैं। वे कहती हैं कि हे प्रियतम! आपके बिना हमारा जीवन शून्य है, एक क्षण भी युग समान प्रतीत होता है। पाठ का फल हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण की भावना उत्पन्न होती है। विरह, दुःख और मानसिक अशान्ति का नाश होता है। दाम्पत्य और पारिवारिक जीवन में मधुरता आती है। भक्ति में स्थिरता, श्रद्धा और आत्मिक आनन्द की प्राप्ति होती है। भगवान के चरणों में प्रेमपूर्वक समर्पण की भावना दृढ़ होती है।
आज बृज में होली रे रसिया - Aaj Braj Mai Holi Re Rasiya
परिचय यह होली का उल्लासमय ब्रज रसिया पद है, जिसमें ब्रजभूमि में राधा-कृष्ण की रंगभरी होली का सजीव चित्रण किया गया है। इसमें नन्दलाल श्रीकृष्ण और बरसाने की राधा रानी के साथ सखियों के हास्य, उमंग और प्रेम का सुंदर वर्णन है। यह पद विशेष रूप से ब्रज की फाग और लठमार होली की परंपरा को प्रकट करता है। भावार्थ इस पद में ब्रज में होली का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत है। सभी गोप-गोपियाँ अपने घरों से निकलकर होली खेलने आती हैं। नन्दगांव के श्रीकृष्ण और बरसाने की राधा रानी आमने-सामने रंगों की बरसात करते हैं। कृष्ण के हाथ में स्वर्ण पिचकारी है और राधा के हाथ में रंगों से भरी कमोरी। अबीर-गुलाल से आकाश लाल हो उठता है और सखियाँ हँसी-ठिठोली में मग्न हो जाती हैं। अंत में सखी कामना करती है कि यह राधा-कृष्ण की दिव्य जोड़ी सदा अटल और अमर रहे।
श्री मारुती स्तोत्र - Shree Maruti Stotram
परिचय भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र श्रीहनुमानजी की महिमा का अत्यंत प्रभावशाली स्तवन है। इसमें हनुमानजी के रौद्र, वीर, तेजस्वी और करुणामय स्वरूप का वर्णन किया गया है। वे अंजनी के पुत्र, पवनसुत, श्रीराम के दूत और भक्तों के संकटहर्ता हैं। इस स्तोत्र में उनके अद्भुत पराक्रम, अपार बल, वेग, तेज और दुष्टों के संहारक रूप का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसका पाठ करने से भय, रोग, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं तथा मन में साहस और आत्मबल की वृद्धि होती है। भावार्थ इस स्तोत्र में हनुमानजी को भीमरूपी, महारुद्र, वज्रसमान बलशाली और प्राणदाता कहा गया है। वे दीनों के नाथ, भक्तों के रक्षक और श्रीराम के परम सेवक हैं। उनका स्वरूप इतना विशाल और तेजस्वी है कि देवता भी विस्मित हो जाते हैं। वे अणु से भी सूक्ष्म और ब्रह्मांड से भी विशाल हो सकते हैं। उनके दर्शन से भूत-प्रेत, रोग-व्याधि, भय और चिंताएँ नष्ट हो जाती हैं। यह स्तोत्र उनके अद्वितीय बल, वेग और भक्तवत्सल स्वभाव का गुणगान करता है।
आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा - Aa Maa Aa Tujhe Dil Ne Pukara
परिचय “आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा” एक अत्यंत लोकप्रिय देवी भजन है, जो माता रानी के प्रति गहरी श्रद्धा और भावपूर्ण पुकार को दर्शाता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, माता की चौकी और जागरण में गाया जाता है। भावार्थ इस भजन में भक्त पूरे मन से माता को पुकारता है और उन्हें अपना एकमात्र सहारा मानता है। वह प्रार्थना करता है कि माँ उसे दर्शन दें और उसके जीवन के भाग्य को जगा दें। भक्त स्वीकार करता है कि उसके जीवन की हर खुशी और उजाला माँ की कृपा से है। वह अपने तन-मन को माँ के चरणों में समर्पित करता है और एक झलक पाने की विनती करता है। यह भजन पूर्ण समर्पण, विश्वास और भक्ति का सुंदर उदाहरण है।
मेरी मां के बराबर कोई नहीं - Meri Maa Ke Barabar Koi Nahi
परिचय “मेरी मां के बराबर कोई नहीं” एक प्रसिद्ध देवी भक्ति भजन है, जिसमें माँ दुर्गा के कालरात्रि और कल्याणी स्वरूप की स्तुति की गई है। इस भजन में माँ की महिमा, ममता और कृपा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन है। यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा और माता जागरण में विशेष रूप से गाया जाता है। भावार्थ भजन में माता के धाम की ऊँचाई और महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि उनके चरणों में बादल भी झुकते हैं। भक्त स्वीकार करता है कि संसार में माँ की ममता से गहरा कोई सागर नहीं। जब भक्त जीवन में डगमगाता है, तो माँ अपनी “दस भुजाओं” से उसे संभाल लेती हैं — यह उनकी शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि माँ के समान न कोई सहारा है, न कोई धन, न कोई धरोहर। पाठ का फल इस भजन को श्रद्धा से गाने या सुनने से मन में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना उत्पन्न होती है। भय और अंधकार दूर होते हैं। घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वास होता है। माँ की कृपा से जीवन में स्थिरता और उन्नति आती है।
जय राम रमा रमनं समनं - Jai Ram Rama Ramnam
परिचय यह भक्तिमय स्तुति भगवान श्रीराम की महिमा का गान करती है। इसमें प्रभु श्रीराम को दीनों के रक्षक, रावण-विनाशक, धर्म के संस्थापक तथा शरणागतवत्सल स्वरूप में स्मरण किया गया है। “राजा राम, सीता राम” का संकीर्तन हृदय में प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण की भावना को जागृत करता है। इस स्तुति में भक्त यह स्वीकार करता है कि संसार के रोग, मोह और दुःख प्रभु के चरणों की भक्ति के बिना दूर नहीं होते। भावार्थ यह स्तुति बताती है कि श्रीराम का नाम और उनके चरणों की भक्ति ही भवसागर से पार लगाने वाली है। जिनके हृदय में राम प्रेम नहीं, वे संसार के दुःखों में उलझे रहते हैं। भक्त अंत में प्रभु से यही वरदान मांगता है कि उसे सदा उनके चरणों की अखंड भक्ति और संतों का संग प्राप्त हो। पाठ का फल भय और संताप का नाश मन में शांति और भक्ति की वृद्धि रामनाम के जप से आध्यात्मिक उन्नति सत्संग और सद्बुद्धि की प्राप्ति
सावन की रुत है आजा माँ - Sawan Ki Rut Hai Aaja Maa
परिचय “सावन की रुत है आजा माँ” एक मधुर और उत्सवमय देवी भजन है, जो सावन मास में विशेष रूप से गाया जाता है। इसमें भक्त माँ को झूला झुलाने, फूलों से सजाने और मेहंदी लगाने की प्रेमपूर्ण भावना व्यक्त करता है। यह भजन सावन झूला उत्सव और नवरात्रि के अवसर पर अत्यंत लोकप्रिय है। भावार्थ भजन में सावन की हरियाली और आनंद के बीच भक्त माँ को अपने आँगन में बुलाता है। चुनरी, चूड़ी, पायल और कंगन अर्पित करना भक्त की श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। “लाखों है रूप माँ तेरे” — यह पंक्ति दर्शाती है कि माँ अनेक रूपों में प्रकट होती हैं, और भक्त केवल एक झलक के लिए व्याकुल है। झूला झुलाने और भोग लगाने का वर्णन भक्ति के प्रेम और उत्सव को प्रकट करता है। पाठ का फल इस भजन को सावन मास में श्रद्धा से गाने से मन में आनंद और उत्साह उत्पन्न होता है। भक्ति और प्रेम की भावना प्रबल होती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का वास होता है।
ओ कंजका हो के दयाल - O Kanjka Jara Hoke Dayaal
परिचय “ओ कंजका हो के दयाल” एक भावपूर्ण माता भजन है, जिसमें भक्त कंजक (कन्या स्वरूप) से प्रार्थना करता है कि वह उसे माँ के दर्शन करा दे। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि और कन्या पूजन के समय गाया जाता है। इसमें माता के दरबार तक पहुँचने की तीव्र लालसा व्यक्त की गई है। भावार्थ भजन में भक्त कंजक से विनती करता है कि जैसे वह प्रतिदिन माँ के चरणों में जाती है, वैसे ही उसे भी माँ की आराधना और साधना का मार्ग बता दे। “स्वर्ग जैसे भवनों में ले चल साथ तू” — यह पंक्ति माता के दिव्य धाम की महिमा को दर्शाती है। भक्त स्वीकार करता है कि उसकी सबसे बड़ी इच्छा माँ के दर्शन करना है। पाठ का फल इस भजन को श्रद्धा से गाने से मन में भक्ति और विनम्रता की भावना उत्पन्न होती है। माँ के दर्शन की तीव्र इच्छा और समर्पण भाव जागृत होता है। नवरात्रि में इसका गायन विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम् - Shree Parvati Vallabham Ashtakam
परिचय श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम् भगवान शिव की स्तुति है, जिसमें उन्हें पार्वती के प्रिय, नीलकण्ठ, भूतनाथ और महेश्वर के रूप में वंदन किया गया है। इस अष्टकम में शिव के वैराग्य, करुणा, तत्त्वज्ञान और भक्तरक्षक स्वरूप का वर्णन है। यह स्तोत्र विशेष रूप से कष्ट निवारण और शिवभक्ति की दृढ़ता के लिए पाठ किया जाता है। भावार्थ इस अष्टकम में भगवान शिव के दिव्य और विरक्त स्वरूप का ध्यान किया गया है। वे श्मशानवासी, भस्मधारी, नागाभूषणधारी तथा त्रिनेत्रधारी हैं। वे भक्तों के रक्षक, कष्टों के नाशक और दीनों पर कृपा करने वाले हैं। जो श्रद्धा से उनका स्मरण करता है, उसे भय और दुःख से मुक्ति प्राप्त होती है। फल इस अष्टकम का नित्य श्रद्धापूर्वक पाठ करने से कष्ट, भय और संकट दूर होते हैं। भक्त को शिवकृपा, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
श्री वेदसार शिव स्तोत्र - Shree Vedsaar Shiv Stotra
परिचय यह श्री शिव स्तोत्रम् है जिसमें भगवान शिव के निराकार और साकार दोनों स्वरूपों का वर्णन किया गया है। इसमें उन्हें पशुपति, महेश, त्रिनेत्र, शूलपाणि तथा विश्वरूप के रूप में नमस्कार किया गया है। यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और तत्त्व स्वरूप का गूढ़ वर्णन करता है। भावार्थ इस स्तोत्र में भगवान शिव को सृष्टि के आदि कारण, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में प्रणाम किया गया है। वे निराकार, निर्विकार और परम ब्रह्म स्वरूप हैं। समस्त जगत उन्हीं से उत्पन्न होकर उन्हीं में स्थित और उन्हीं में लीन होता है। जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह पापों से मुक्त होकर परम शांति को प्राप्त करता है। पाठ का फल इस स्तोत्र का नित्य श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भय, क्लेश और सांसारिक बंधन दूर होते हैं। मन में अद्वैत भाव जागृत होता है तथा शिव कृपा से आत्मिक उन्नति और अंतःकरण की शुद्धि प्राप्त होती है।
श्रीकालिकाष्टकम् - Shree Kali Ashtakam
परिचय यह माँ काली का अत्यंत गूढ़ एवं तांत्रिक भाव से युक्त अष्टकम् है, जिसमें उनके उग्र तथा करुणामयी दोनों दिव्य स्वरूपों का वर्णन किया गया है। इसमें माँ के श्मशानवासी, महाकाल-सहचरी और जगन्मोहिनी रूप का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से काली पूजा, दीपावली की रात्रि, नवरात्रि तथा तांत्रिक साधना में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पाठ किया जाता है। भावार्थ इस अष्टकम् में माँ काली के उग्र स्वरूप का वर्णन है — गले में मुंडमाला, रक्ताभ जिह्वा, श्मशान में निवास और महाकाल के साथ अद्वैत एकत्व। उनका यह रूप संसार के भय, अज्ञान और अधर्म के विनाश का प्रतीक है। साथ ही, उन्हें भक्तों पर असीम कृपा करने वाली, इच्छाओं को पूर्ण करने वाली तथा मोक्ष प्रदान करने वाली आदिशक्ति बताया गया है। देवता भी उनके वास्तविक स्वरूप को पूर्णतः नहीं जान पाते — वे अनादि, अनन्त और परम रहस्यमयी हैं। अंत में कहा गया है कि जो साधक श्रद्धा और ध्यानपूर्वक इस अष्टकम् का पाठ करता है, उसे सिद्धियाँ, सफलता तथा अंततः मुक्ति की प्राप्ति होती है।
श्री धन्वंतरि स्तोत्रम् - Shree Dhanvantari Stotram
भोले तेरा नाम जपूं - Bhole Tera Naam Japun
परिचय यह भावपूर्ण भजन भगवान शिव (भोलेनाथ) की भक्ति में गाया जाता है। इसमें भक्त पूर्ण विश्वास और समर्पण के साथ महादेव को अपने घर और हृदय में आमंत्रित करता है। भजन में शिव आगमन की मंगलमयी तैयारी, नंदी का स्मरण और आनंदपूर्ण उत्सव का भाव प्रकट होता है। भावार्थ भजन में भक्त शिव नाम का जप करते हुए उनसे पूर्ण समर्पण की प्रार्थना करता है। वह चाहता है कि महादेव उसके जीवन में प्रकट हों और उसे संसार के मोह से दूर रखें। शंखनाद, नंदी का बुलावा और शिव सवारी का वर्णन उत्सव, श्रद्धा और आनंद का प्रतीक है। गाने का अवसर महाशिवरात्रि सावन मास सोमवार व्रत शिव मंदिर भजन संध्या