जे अनिलो प्रेम धन - Je Anilo Prem Dhan

यह अत्यंत करुणामयी और विरह भाव से परिपूर्ण गौड़ीय वैष्णव भजन श्रील नरोत्तम दास ठाकुर द्वारा रचित है। इस भजन में वे श्रीचैतन्य महाप्रभु के परम पार्षदों और आचार्यों के वियोग में अपनी गहन व्यथा व्यक्त करते हैं।

जे अनिलो प्रेम-धन कोरुना प्रकुर।
हेनो प्रभु कोथा गेला आचार्य-ठाकुर॥

अर्थ: दिव्य प्रेम का खजाना लाने वाले और करुणा एवं दया से परिपूर्ण। श्रीनिवास आचार्य जैसे व्यक्तित्व कहाँ चले गए॥
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कह मोरा स्वरूप रूप, कहा सनातन।
कहा दासा रघुनाथ पतित-पावन॥

अर्थ: मेरे स्वरूप दामोदर और रूप गोस्वामी कहाँ हैं? सनातन कहाँ हैं? पतितों के उद्धारक रघुनाथ दास कहाँ हैं?
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कह मोरा भट्टा-जुगा, कहा कविराज।
एका-काले कोठा गेला गोरा नाता-राज॥

अर्थ: मेरे रघुनाथ भट्ट और गोपाल भट्ट कहाँ हैं, और कृष्णदास कविराज कहाँ हैं? महान नर्तक भगवान गौरांग अचानक कहाँ चले गए?
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पशाने कुटिबो माथा, अनले पसिबो।
गौरांग गुणेरा निधि कोठा गेले पाबो॥

अर्थ: मैं अपना सिर चट्टान पर पटक कर अग्नि में प्रवेश करूँगा। मुझे समस्त अद्भुत गुणों के भंडार भगवान गौरांग कहाँ मिलेंगे?
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से-सबा संगीरा संगे, जे कोइलो बिलास।
से-संगा ना पइया कांदे नरोत्तम दास॥

अर्थ: भगवान गौरांग और उनके सभी भक्तों की संगति प्राप्त न कर पाने के कारण, जिनके साथ उन्होंने अपनी दिव्य लीलाएँ कीं, नरोत्तम दास केवल विलाप करते हैं।

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परिचय यह अत्यंत मधुर, सरल और हृदय को भक्ति रस से भर देने वाला भजन भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के पावन नाम-स्मरण की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। भजन में “सीता राम” और “राधे श्याम” नामों का बार-बार उच्चारण करके भक्तों को यह संदेश दिया गया है कि कलियुग में प्रभु का नाम ही सबसे बड़ा सहारा, सबसे बड़ी शक्ति और सबसे सरल साधना है। इस भजन के माध्यम से यह बताया गया है कि संसार में सब कुछ नश्वर और परिवर्तनशील है। जीवन कब बदल जाए, कौन अपना रहे और कौन पराया हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। ऐसे समय में केवल भगवान का नाम ही मनुष्य को स्थिरता, शांति और आत्मिक सुख प्रदान करता है। “सीता राम” और “राधे श्याम” का संकीर्तन केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य मार्ग है। भजन के शब्द अत्यंत सहज हैं, लेकिन इनके भीतर गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा हुआ है। यह भजन मनुष्य को सांसारिक चिंताओं से हटाकर प्रभु प्रेम की ओर ले जाता है और जीवन में श्रद्धा, प्रेम, संतोष तथा सकारात्मकता भर देता है। जब भक्त पूरे मन से प्रभु का नाम गाता है, तब उसका मन धीरे-धीरे निर्मल होने लगता है और उसे ईश्वर की कृपा का अनुभव होने लगता है। भावार्थ इस भजन में भक्त सभी लोगों को प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम और राधे-श्याम का नाम जपने की प्रेरणा देता है। वह समझाता है कि यह संसार क्षणभंगुर है और यहाँ किसी भी वस्तु, संबंध या सुख का स्थायी अस्तित्व नहीं है। मनुष्य जीवन में कभी सुख आता है तो कभी दुःख, कभी अपने साथ देते हैं तो कभी साथ छोड़ देते हैं। इसलिए केवल सांसारिक मोह-माया पर भरोसा करने के बजाय प्रभु के नाम का आश्रय लेना चाहिए। भजन में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने अंतरमन से भगवान का सच्चे भाव से स्मरण करे और अपने जीवन को प्रेम रूपी अमृत से भर ले, तो उसका जीवन धीरे-धीरे बदलने लगता है। प्रभु का नाम मन को शांति देता है, दुखों को कम करता है और आत्मा को आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। “धीरे-धीरे राम जी का साथ पाइये” पंक्ति का अर्थ है कि भक्ति का मार्ग धैर्य, प्रेम और निरंतर स्मरण का मार्ग है। जो भक्त नियमित रूप से प्रभु का नाम जपता है, उसके जीवन में ईश्वर की कृपा स्वतः प्रकट होने लगती है। अंततः यह भजन यही संदेश देता है कि भगवान का नाम ही जीवन का सच्चा धन, सच्चा सहारा और परम आनंद का स्रोत है।

श्याम जो करेंगे अच्छा करेंगे - Shyam Jo Karenge Acha Karenge
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परिचय  यह भजन भगवान श्याम के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि इस संसार में किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हर एक सांस और हर एक परिस्थिति प्रभु के अधीन है। भजन यह दर्शाता है कि भगवान ही सृष्टि के रचनाकार हैं और वही हमारे जीवन का संचालन करते हैं। जब भक्त यह विश्वास अपने मन में स्थापित कर लेता है, तो उसके जीवन से भय और चिंता स्वतः समाप्त हो जाते हैं। भावार्थ  इस भजन के माध्यम से यह समझाया गया है कि संसार का मोह और संबंध क्षणिक हैं, जबकि भगवान का साथ सदा के लिए होता है। केवल प्रभु ही हमारे मन की पीड़ा को सही मायने में समझ सकते हैं और हर संकट में हमारी रक्षा करते हैं। यदि हम सच्चे मन से भगवान पर विश्वास रखें, तो वह हमारे जीवन में जो भी करेंगे, वह हमारे लिए सर्वोत्तम होगा। यह भजन हमें यह सिखाता है कि हमें हर परिस्थिति में भगवान की इच्छा को स्वीकार करते हुए प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि अंततः वही हमारे जीवन को सुंदर और सफल बनाते हैं।

भक्ति रस के और इस्कॉन भजन - Iskcon BhajanMore Bhajans

श्री नरसिम्हा कवच - Shree Narasimha Kavacha
श्री नरसिम्हा कवच - Shree Narasimha Kavacha

परिचय नृसिंह कवच एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र स्तोत्र है, जो भगवान नृसिंह की कृपा और संरक्षण प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह कवच भक्त प्रह्लाद द्वारा प्रकट किया गया माना जाता है और इसमें भगवान के उग्र तथा करुणामय दोनों स्वरूपों का वर्णन मिलता है। इस स्तोत्र में भगवान नृसिंह को सर्वव्यापी रक्षक के रूप में स्मरण किया गया है, जो अपने भक्तों को हर प्रकार के भय, संकट, नकारात्मक शक्तियों और अनिष्ट प्रभावों से बचाते हैं। इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में साहस, आत्मविश्वास, आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि एक दिव्य सुरक्षा कवच है जो साधक के तन, मन और जीवन को संतुलन और शांति प्रदान करता है। भावार्थ नृसिंह कवच का मुख्य भाव यह है कि भगवान नृसिंह अपने भक्तों के लिए सर्वोच्च रक्षक हैं, जो हर दिशा, हर परिस्थिति और जीवन के प्रत्येक अंग की रक्षा करते हैं। इस स्तोत्र में भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि वे उसके सिर से लेकर पांव तक, उसके मन, बुद्धि, इंद्रियों और जीवन के हर पहलू को सुरक्षित रखें। यह भक्ति केवल भय से मुक्ति की याचना नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। कवच यह सिखाता है कि जब मनुष्य सच्चे मन से भगवान की शरण में जाता है, तो कोई भी संकट या बाधा उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती। इसमें भगवान के विभिन्न स्वरूपों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि वे हर दिशा में उपस्थित हैं और हर स्थिति में अपने भक्त की रक्षा करते हैं। अंततः यह स्तोत्र यह संदेश देता है कि श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ किया गया स्मरण व्यक्ति को न केवल भौतिक सुख देता है, बल्कि उसे आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की ओर भी अग्रसर करता है।

गोविंदम अदि पुरुषम - Govindam Adi Pursham
गोविंदम अदि पुरुषम - Govindam Adi Pursham

परिचय यह दिव्य स्तुति ब्रह्म संहिता से ली गई है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के “गोविन्द” स्वरूप की महिमा का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। “गोविन्द” का अर्थ है—इंद्रियों को आनंद देने वाले, गौओं और पृथ्वी के रक्षक, तथा समस्त जीवों के पालनकर्ता। इन श्लोकों में भगवान के रूप, गुण और उनकी अनंत शक्तियों का वर्णन किया गया है। एक ओर उनके मधुर और मनोहर स्वरूप—बांसुरी बजाने वाले, मोरपंख धारण करने वाले श्रीकृष्ण—का चित्रण है, तो दूसरी ओर उनकी सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमत्ता का भी वर्णन मिलता है। भावार्थ इन श्लोकों का मुख्य भाव भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण को व्यक्त करना है। पहले श्लोक में उनके अद्भुत सौंदर्य का वर्णन है—उनकी बांसुरी, उनकी कमल जैसी आंखें और उनका श्यामल स्वरूप भक्त के मन को मोह लेता है। दूसरे श्लोक में उनकी दिव्यता और सर्वशक्तिमत्ता का वर्णन है। भगवान का शरीर साधारण नहीं, बल्कि पूर्णतः चेतन और आनंदमय है। वे अपने किसी भी अंग से कोई भी कार्य कर सकते हैं—यह उनकी अनंत शक्ति का प्रतीक है। बार-बार “गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि” कहना यह दर्शाता है कि भक्त का मन पूरी तरह भगवान में लीन हो गया है और वह हर क्षण केवल उन्हीं का स्मरण और भजन करना चाहता है।

श्री गुरु वंदना - Shree Guru Vandana
श्री गुरु वंदना - Shree Guru Vandana

यह वैष्णव भजन “श्रीगुरुचरण पद्म” श्रीगुरुदेव की महिमा, करुणा और अनन्य कृपा का भावपूर्ण वर्णन करता है। गुरु को भक्ति का आश्रय, भवसागर से पार लगाने वाला और दिव्य ज्ञान प्रदान करने वाला माना गया है। इस भजन में गुरु के चरणों में पूर्ण शरणागति, निष्ठा और प्रेम-भक्ति का सुंदर भाव प्रकट होता है। यह भजन साधकों को गुरु-कृपा द्वारा कृष्ण-प्राप्ति के मार्ग पर दृढ़ करता है।

जय श्री कृष्णा बोलो जय राधे - Jai Shree Krishna Bolo Jai Radhe
जय श्री कृष्णा बोलो जय राधे - Jai Shree Krishna Bolo Jai Radhe

भजन का परिचय यह भजन “जय श्री कृष्णा बोलो, जय राधे” ब्रज वैष्णव परंपरा का अत्यंत सरल और मधुर नाम-स्मरण भजन है। इसमें भक्तों को श्रीकृष्ण और श्रीराधा के पावन नामों का उच्चारण करने के लिए प्रेरित किया गया है। यह भजन समूह कीर्तन और व्यक्तिगत साधना — दोनों के लिए उपयुक्त है और बहुत कम शब्दों में गहन भक्ति भाव प्रकट करता है। भजन का भावार्थ इस भजन का भाव यह है कि श्रीकृष्ण और श्रीराधा के नाम का स्मरण करने मात्र से मन शुद्ध होता है और हृदय में प्रेम का संचार होता है। “जय” का उच्चारण आनंद, कृतज्ञता और उत्सव भाव को दर्शाता है। राधे नाम का बार-बार उच्चारण यह दर्शाता है कि श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का सहज मार्ग श्रीराधा की शरण है। यह भजन सरल होते हुए भी भक्त को गहरे आत्मिक अनुभव की ओर ले जाता है। यह भजन कब और कहाँ गाया जाता है यह भजन विशेष रूप से वृन्दावन, बरसाना और ब्रज क्षेत्र में नाम-संकीर्तन, राधाष्टमी, जन्माष्टमी और दैनिक जप के समय गाया जाता है। इस्कॉन मंदिरों, वैष्णव सत्संगों और घर में की जाने वाली साधना में भी यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है।

भज मन राधे  गोविंदा - Bhajman Radhe Govinda
भज मन राधे गोविंदा - Bhajman Radhe Govinda

भजन का परिचय यह भजन “भज मन राधे राधे गोविंदा” ब्रज वैष्णव परंपरा का अत्यंत सरल, मधुर और प्रभावशाली नाम-स्मरण भजन है। इसमें भक्त अपने मन को उपदेश देता है कि वह संसार की चंचलता छोड़कर श्रीराधा और श्रीकृष्ण के पावन नामों का निरंतर स्मरण करे। राधा और गोविंद का संयुक्त नाम जप वैष्णव भक्ति में सर्वोच्च माना गया है। भजन का भावार्थ इस भजन का मूल भाव यह है कि मनुष्य का मन बार-बार विषयों की ओर भटकता है, इसलिए उसे प्रेमपूर्वक समझाया गया है कि वह केवल राधे–राधे गोविंदा का जप करे। राधा नाम के साथ गोविंद का स्मरण यह दर्शाता है कि श्रीकृष्ण तक पहुँचने का सरल और सुलभ मार्ग श्रीराधा की कृपा है। यह भजन भक्त के हृदय में माधुर्य, प्रेम, दीनता और पूर्ण समर्पण का भाव उत्पन्न करता है। निरंतर दोहराव नाम-जप को सहज, गहन और रसपूर्ण बनाता है। यह भजन कब और कहाँ गाया जाता है यह भजन विशेष रूप से वृन्दावन, बरसाना और ब्रज क्षेत्र में नाम-संकीर्तन, राधाष्टमी, जन्माष्टमी, होली और दैनिक साधना के समय गाया जाता है। इस्कॉन मंदिरों, वैष्णव सत्संगों और व्यक्तिगत जप के लिए यह भजन अत्यंत उपयुक्त है।

गुरु अष्टकम् - Guru Ashtakam
गुरु अष्टकम् - Guru Ashtakam

परिचय श्री गुरु अष्टकम् वैष्णव परंपरा का अत्यंत पावन स्तोत्र है, जिसकी रचना श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने की थी। यह स्तुति सद्गुरु को भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का साक्षात् माध्यम मानते हुए उनके श्रीचरणों में पूर्ण शरणागति का भाव प्रकट करती है। इसमें गुरु को अज्ञानरूपी अग्नि से संसार को बचाने वाला, भक्ति का मार्ग दिखाने वाला और राधा-कृष्ण प्रेम का दाता बताया गया है। भावार्थ इस स्तुति का भाव यह है कि सद्गुरु की कृपा से ही जीव संसाररूपी दावानल से मुक्त होकर भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है। गुरु न केवल शास्त्रज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि अपने आचरण, सेवा और प्रेम के द्वारा भक्त को राधा-कृष्ण की मधुर लीलाओं से जोड़ते हैं। गुरु की प्रसन्नता से ही भगवान की प्रसन्नता प्राप्त होती है, और उनकी कृपा के बिना मोक्ष या भक्ति की सिद्धि संभव नहीं है।

भज गौरांग कहो गौरांग - Bhaj Gaurang Kaha Gaurang
भज गौरांग कहो गौरांग - Bhaj Gaurang Kaha Gaurang

परिचय भज गौरांग कहो गौरांग एक अत्यंत भावपूर्ण वैष्णव भजन है, जो श्री चैतन्य महाप्रभु (गौरांग प्रभु) और हरे कृष्ण महामंत्र की महिमा का गुणगान करता है। इस भजन में नाम-स्मरण, नृत्य, प्रेम-भक्ति और हरिनाम की शक्ति को सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह भजन वैष्णव परंपरा में नाम-संकीर्तन का प्रतीक माना जाता है। भजन / पाठ का फल इस भजन का श्रद्धा से गायन या श्रवण करने से: मन में नाम-स्मरण की रुचि बढ़ती है जीवन के क्लेश, दुःख और भय दूर होते हैं कृष्ण-प्रेम और वैराग्य का विकास होता है चित्त शुद्ध होकर आनंद और शांति की अनुभूति होती है भक्त को गौरांग प्रभु और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है कलियुग में यह भजन मोक्ष का सरल साधन माना गया है

 राधे राधे गोविन्द - Radhe Radhe Govinda
राधे राधे गोविन्द - Radhe Radhe Govinda

भज मन राधे राधे गोविन्द भजन का परिचय यह भजन “भज मन राधे राधे गोविन्द” ब्रज भक्ति परंपरा का एक अत्यंत मधुर और सरल भजन है, जो भक्त को सीधे राधा-कृष्ण नाम-स्मरण की ओर प्रेरित करता है। इस भजन में मन को उपदेश दिया गया है कि वह संसार की चंचलता छोड़कर श्रीराधा और श्रीकृष्ण के पावन नामों का निरंतर जप करे। राधा और गोविन्द का संयुक्त स्मरण वैष्णव भक्ति में सर्वोच्च माना गया है, क्योंकि श्रीराधा के बिना गोविन्द की प्राप्ति संभव नहीं मानी जाती। भजन का भावार्थ इस भजन का मुख्य भाव यह है कि मनुष्य का मन बार-बार विषयों की ओर भटकता है, इसलिए उसे प्रेमपूर्वक समझाया गया है कि वह राधे-राधे गोविन्द का स्मरण करे। “राधे-राधे गोविन्द, गोविन्द-राधे” का उच्चारण यह दर्शाता है कि राधा और कृष्ण एक-दूसरे से अभिन्न हैं। यह भजन भक्त के हृदय में माधुर्य, प्रेम और दीनता का भाव उत्पन्न करता है। जय-जय का उच्चारण आनंद, कृतज्ञता और उत्सव भाव को प्रकट करता है, जिससे नाम-जप और भी रसपूर्ण बन जाता है। यह भजन कब और कहाँ गाया जाता है यह भजन विशेष रूप से वृन्दावन, बरसाना और ब्रज क्षेत्र में नाम-संकीर्तन, राधाष्टमी, होली, जन्माष्टमी और दैनिक भजन-साधना के समय गाया जाता है। इस्कॉन मंदिरों और वैष्णव सत्संगों में भी इसे समूह कीर्तन के रूप में गाया जाता है। यह भजन व्यक्तिगत जप और सामूहिक कीर्तन — दोनों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

हरे कृष्ण महामंत्र - Hare Krishna Mahamantra
हरे कृष्ण महामंत्र - Hare Krishna Mahamantra

हरे कृष्ण महामंत्र वैष्णव परंपरा का अत्यंत पावन और प्रभावशाली मंत्र है, जिसे इस्कॉन (ISKCON) द्वारा पूरे विश्व में प्रचारित किया गया है। इस महामंत्र का नियमित जप करने से मन की अशांति दूर होती है, चित्त शुद्ध होता है और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम व भक्ति का भाव जागृत होता है। कलियुग में इसे आत्मिक उन्नति, शांति और मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल साधन माना गया है। #HareKrishna #HareKrishnaMahaMantra #ISKCON #KrishnaBhakti #NaamJapa #BhaktiYoga #Vaishnav #SanatanDharma

हरि हराये नमः कृष्ण यादवाय नमः - Hari Haraye Namah Krishna Yadvay Namah
हरि हराये नमः कृष्ण यादवाय नमः - Hari Haraye Namah Krishna Yadvay Namah

गुरु-वैष्णव वंदना भजन का परिचय यह भजन “हरि हराये नमः कृष्ण यादवाय नमः” गौड़ीय वैष्णव परंपरा की एक अत्यंत पावन और अनिवार्य वंदना है। यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के नामों के स्मरण के साथ-साथ श्री गुरु, वैष्णवों, पंच-तत्त्व और षड् गोस्वामियों के चरणों में विनम्र नमन व्यक्त करता है। इस भजन को वैष्णव साधना में नाम-संकीर्तन का द्वार माना जाता है। भजन का भावार्थ इस भजन में भक्त सबसे पहले श्रीहरि और श्रीकृष्ण के अनेक नामों का जप करता है, जिससे मन शुद्ध होता है और अहंकार का क्षय होता है। इसके पश्चात श्री चैतन्य महाप्रभु, नित्यानंद प्रभु, अद्वैत आचार्य और समस्त गुरु-वैष्णव परंपरा के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। षड् गोस्वामियों के चरणों में वंदन कर यह स्वीकार किया गया है कि उन्हीं की कृपा से राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं का ज्ञान प्राप्त होता है। भक्त स्वयं को उनका दास मानते हुए उनके चरणों की धूल को जीवन का परम लक्ष्य बताता है। यह भजन कब और कहाँ गाया जाता है यह भजन इस्कॉन मंदिरों, गौड़ीय मठों और वैष्णव सत्संगों में कीर्तन प्रारंभ करने से पहले अनिवार्य रूप से गाया जाता है। गुरु पूजा, एकादशी, वैष्णव तिथियाँ और नाम-संकीर्तन के अवसरों पर इसका विशेष महत्व है।