संसों की माला पे सिमरू मैं राधे श्याम - Sanso Ki Mala Pe Simru Main Radhe Shyam

यह भजन राधा-कृष्ण के नाम-स्मरण की महिमा और प्रेम-भक्ति की गहराई को अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें भक्त की वह अवस्था दिखाई गई है, जब उसका मन पूरी तरह प्रभु के नाम में लीन हो जाता है और सांसों के साथ-साथ “राधे-श्याम” का स्मरण चलता रहता है।

सांसों की माला पे, सिमरूं राधे श्याम
अब तो दुनियादारी से है, मेरा क्या काम

प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप
प्रेम की माला जपते-जपते, आप बनी मैं स्वरूप

श्री राधे श्री राधे, श्री राधे श्याम
राधे श्याम दिल में बसे हैं, संग रहें दिन-रात

अपने मन की मैं जानूँ, सबके मन की राम
सांसों की माला पे, सिमरूं राधे श्याम

राधे श्याम अंतर्यामी, वो मेरे स्वामी
राधे के चरणों में अर्पण, ये जीवन तमाम

प्रेम पियाला जबसे पिया है, जी का है ये हाल
अंगारों पे नींद आ जाए, और कांटों पे आराम

सांसों की माला पे, सिमरूं मैं राधे श्याम
सांसों की माला पे, सिमरूं मैं राधे श्याम

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