मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा - Man Mera Mandir Shiv Meri Puja

यह दिव्य शिव भजन “ॐ नमः शिवाय नमो” भगवान शिव की महिमा, भक्ति और सत्य स्वरूप का सुंदर वर्णन करता है।

ॐ नमः शिवाय नमो,
ॐ नमः शिवाय नमो।

मन मेरा मंदिर,
शिव मेरी पूजा।

शिव से बड़ा,
नहीं कोई दूजा॥

बोल सत्यम शिवम्,
बोल तू सुंदरम।

मन मेरे शिव की महिमा,
के गुण गए जा॥

पार्वती जब सीता बनकर,
जय श्री राम के सन्मुख आयी।

राम ने उनको माता कहकर,
शिव शंकर की महिमा गायी॥

शिव भक्ति में सब कुछ सुझा,
शिव से बढ़कर नहीं कोई दूजा॥

तेरी जटा से निकली गंगा,
और गंगा ने भीष्म दिया है।

तेरे भक्तों की शक्ति ने,
सारे जगत को जीत लिया है॥

तुझको सब देवों ने पूजा,
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा॥

मन मेरा मंदिर,
शिव मेरी पूजा।

शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा,
बोल सत्यम शिवम् सुंदरम॥

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महाकाल की गुलामी - Mahakal Ki Gulami
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चलो केदारनाथ - Chalo Kedarnath
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परिचय यह भजन भगवान शिव के पावन धाम केदारनाथ की महिमा और वहाँ जाने की तीव्र भक्तिभावना को अत्यंत सुंदर तरीके से व्यक्त करता है। इसमें भक्त के मन में उठती उस पुकार को दर्शाया गया है, जो उसे हिमालय की ऊँचाइयों में स्थित बाबा केदार के दरबार तक खींच ले जाती है। भजन में प्रकृति—हवाएं, नदियां और बर्फीली वादियां—भी मानो शिव का गुणगान करती प्रतीत होती हैं, जिससे इसकी भक्ति और भी गहरी हो जाती है। भावार्थ इस भजन में भक्त यह अनुभव करता है कि केदारनाथ की यात्रा केवल एक साधारण यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव का बुलावा है। वह मानता है कि जब तक शिव स्वयं नहीं बुलाते, तब तक कोई भी उनके धाम तक नहीं पहुंच सकता। भजन में यह भी दर्शाया गया है कि जब भक्त शिव के चरणों में पहुंच जाता है, तो वह पूरी तरह उनके भरोसे खुद को समर्पित कर देता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा, विश्वास और समर्पण से ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की हर कठिनाई दूर हो जाती है।

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