शनि देव तुम सुख के सागर - Shani Dev tum sukh ke saagar

यह भावपूर्ण शनि भजन शनि देव से कृपा, दया और संरक्षण की प्रार्थना करता है, ताकि जीवन के कष्ट दूर हों और भक्त का बेड़ा पार हो सके।

शनि देव तुम सुख के सागर, भर दो मेरे खाली गागर।
सिगनापुर सरकार, शनि जी कर दो बेड़ा पार॥

मैं सेवक तू मेरा स्वामी, कृपा कर दो अंतर्यामी।
मुझपे अपनी दया दिखा दो, मेहर करो तक़दीर जगा दो॥

सिर पे रखके हाथ दया का, दे दो अपना प्यार।
शनि जी कर दो बेड़ा पार, शनि जी कर दो बेड़ा पार॥

तेरे बिन किसके दर जाऊँ, किसको अपना हाल सुनाऊँ।
तू ही सबकी सुनने वाला, ध्यान सभी पे धरने वाला॥

हाथ पकड़ के मेरा मुझको, भव सागर से तार।
शनि जी कर दो बेड़ा पार, शनि जी कर दो बेड़ा पार॥

तेरे दर पे अर्ज लगाई, दाता मेरे करो सुनाई।
तुम तो हो बड़े दिलवाले, बन जाओ मेरे रखवाले॥

तुझ बिन मेरा और न कोई, कौन सुनेगा पुकार।
शनि जी कर दो बेड़ा पार, शनि जी कर दो बेड़ा पार॥

शनि देव तुम सुख के सागर, भर दो मेरे खाली गागर।
सिगनापुर सरकार, शनि जी कर दो बेड़ा पार॥

अन्य लोकप्रिय भजन

सभी देखें
सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है - Saare Jahan Ke Malik Tera Hi Aasara Hai
Ram bhajan

सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है - Saare Jahan Ke Malik Tera Hi Aasara Hai

परिचय यह अत्यंत भावपूर्ण और आत्मसमर्पण से भरा भजन परमात्मा के प्रति पूर्ण विश्वास, श्रद्धा और स्वीकार भाव को प्रकट करता है। भजन में भक्त ईश्वर को समस्त संसार का स्वामी मानते हुए कहता है कि उसका एकमात्र सहारा केवल वही प्रभु हैं। जीवन में सुख आए या दुःख, सफलता मिले या कठिनाई — हर परिस्थिति को प्रभु की इच्छा मानकर स्वीकार करना ही सच्ची भक्ति है। भजन के शब्द मनुष्य को यह प्रेरणा देते हैं कि ईश्वर हमारी हर स्थिति, हर पीड़ा और हर भावना को बिना कहे समझते हैं। भक्त अपने जीवन की मजबूरियों, दुःखों और संघर्षों को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है और उनकी इच्छा में ही अपनी खुशी खोज लेता है। सरल भाषा और गहरे आध्यात्मिक भावों से भरा यह भजन मन को शांति, धैर्य और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास से भर देता है। भावार्थ इस भजन में भक्त कहता है कि संसार में उसका सबसे बड़ा सहारा केवल परमात्मा हैं और वही उसके जीवन का आधार हैं। भक्त प्रभु की हर इच्छा को स्वीकार करते हुए कहता है कि जो कुछ भी उसके जीवन में घट रहा है, वह सब भगवान की रज़ा से ही हो रहा है। इसलिए वह हर परिस्थिति में संतोष और समर्पण का भाव रखता है। भजन यह भी बताता है कि भगवान अपने भक्त के मन की हर बात जानते हैं। भक्त चाहे अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त न कर पाए, फिर भी प्रभु उसकी हर मजबूरी और हर भावना को समझते हैं। जीवन में आने वाले दुःख और सुख दोनों को ईश्वर की कृपा मानकर स्वीकार करना ही सच्चे भक्त का गुण है। अंत में भक्त भगवान से कोई शिकायत नहीं करता, बल्कि इस बात के लिए भी उनका धन्यवाद करता है कि उन्होंने उसे इस संसार में भेजा और अपने स्मरण का अवसर दिया। यह भजन पूर्ण समर्पण, धैर्य, संतोष और प्रभु की इच्छा में प्रसन्न रहने का सुंदर संदेश देता है।

राधा नाम परम सुख दायी - Radha Naam Param Sukhdai
Radha rani

राधा नाम परम सुख दायी - Radha Naam Param Sukhdai

परिचय यह एक अत्यंत सरल, मधुर और भावपूर्ण राधा भजन है, जिसमें श्री राधा नाम की महिमा का वर्णन किया गया है। इस भजन में भक्त अपने जीवन को राधा नाम के जप में समर्पित करने की भावना व्यक्त करता है। भजन की पंक्तियों में ब्रज भूमि के प्रति प्रेम, संतों के दर्शन की इच्छा और संसार से विरक्ति का भाव स्पष्ट रूप से झलकता है। यह भजन भक्ति के शांत और मधुर रस को प्रकट करता है। भावार्थ इस भजन का मुख्य भाव यह है कि “राधा” नाम का स्मरण ही जीवन का सबसे बड़ा सुख और आनंद देने वाला है। भक्त यह चाहता है कि उसका पूरा जीवन राधा नाम जपते हुए बीते और वह ब्रजधाम में रहकर संतों का संग प्राप्त करे। भजन यह सिखाता है कि जब मन संसार की मोह-माया से हटकर राधा नाम में लग जाता है, तब सच्चा सुख और शांति प्राप्त होती है। यही भक्ति का सर्वोच्च मार्ग है।

नख पर धार लियो गिरिराज - Nakh Pe Dhaar Liyo Giriraj
Krishna bhajan

नख पर धार लियो गिरिराज - Nakh Pe Dhaar Liyo Giriraj

परिचय यह अत्यंत भक्तिमय और उत्साहपूर्ण कृष्ण भजन भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का सुंदर वर्णन करता है। भजन में उस दिव्य प्रसंग को गाया गया है जब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सम्पूर्ण ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसी अद्भुत लीला के कारण उन्हें “गिरधारी” नाम प्राप्त हुआ। भजन में इन्द्र के अहंकार, मूसलधार वर्षा और श्रीकृष्ण की करुणामयी रक्षा का अत्यंत सरल और मधुर चित्रण किया गया है। यह भजन भक्तों को भगवान की शक्ति, करुणा और अपने भक्तों के प्रति उनके प्रेम का अनुभव कराता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर संकट में उनके साथ खड़े रहते हैं। भावार्थ इस भजन में वर्णन किया गया है कि जब ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर इन्द्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की, तब इन्द्र को बहुत क्रोध आया। अपने अहंकार में आकर इन्द्र ने ब्रज में मूसलधार वर्षा आरंभ कर दी ताकि सम्पूर्ण ब्रज डूब जाए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ब्रजवासियों, गौओं और जीवों को उसके नीचे सुरक्षित आश्रय दिया। इन्द्र आश्चर्यचकित रह गया कि इतनी प्रचंड वर्षा के बाद भी ब्रज का कुछ नहीं बिगड़ा। तब उसे अपनी भूल और अहंकार का एहसास हुआ। भजन यह संदेश देता है कि भगवान अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं और अहंकार का अंत निश्चित है। श्रीकृष्ण की यह लीला प्रेम, संरक्षण और दिव्य शक्ति का प्रतीक है। “गिरधारी” नाम भगवान की उसी महान कृपा और गोवर्धन धारण लीला की याद दिलाता है।

 हरि गुण गाके जीवन बनाले पगला - Hari Gun Gake Jivan Banale Pagla
Ram bhajan

हरि गुण गाके जीवन बनाले पगला - Hari Gun Gake Jivan Banale Pagla

परिचय यह भजन मानव जीवन के सच्चे उद्देश्य को सरल और प्रभावी शब्दों में समझाने वाला एक प्रेरणादायक भजन है। इसमें बताया गया है कि यह जीवन अनमोल है और इसे व्यर्थ न गंवाकर भगवान के गुणों का गान करते हुए सार्थक बनाना चाहिए। भजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भक्ति ही वह मार्ग है, जो जीवन को सही दिशा और सच्चा आनंद प्रदान करता है। भावार्थ इस भजन में कहा गया है कि यदि मनुष्य भगवान का भजन नहीं करता, तो उसका जीवन व्यर्थ हो जाता है और वह कहीं का नहीं रहता। इतिहास और पुराणों के उदाहरण देकर बताया गया है कि गणिका, अजामिल, गिद्ध (जटायु) और शबरी जैसे साधारण या पापी माने जाने वाले भी भगवान के गुण गाकर और उनकी शरण में आकर सिद्ध हो गए। इससे यह शिक्षा मिलती है कि चाहे कोई भी हो, यदि वह सच्चे मन से भगवान का स्मरण करे, तो उसका जीवन सुधर सकता है और उसे मुक्ति का मार्ग मिल सकता है।