सिया राम - Siya Ram
यह भजन भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र प्रेम, मर्यादा और दिव्यता का सुंदर वर्णन करता है। इसमें “राम सिया राम” नाम की महिमा का गुणगान करते हुए भक्त उनके दर्शन और स्मरण की लालसा व्यक्त करता है। यह भजन श्रद्धा, भक्ति और शांति का अद्भुत संगम है, जो मन को प्रभु के चरणों में जोड़ देता है।
सिया मुख पर दिख जाए मुस्कान, जो राम दरस मिल जाए ।
सिया राम नाम से बनी है जोगन, राम नाम की कहाए।।
जिसे प्रीत लगे बस राम से, उसकी लाज रखे एक नाम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
मंगल भवन अमंगल हारी, द्रावहु सू दशरथ अजीर बिहारी ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
शृंगार सिया का राम सिया, रघुवर का वाम कहाए ।
संग पिया चले सिया मति ताके, पाठ जब राम दिखाए।।
हृदय में ऐसे राम बसे, हृदय में राम का धाम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
हरी अनंत हरी कथा अनंता, कहा ही सुनहि बहुविधि सब संता ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
नख से शिख सुंदर रूप राम का, राम जगत कहलाए ।
संग सिया के शोभित रघुनंदन, संग संग सिया राम कहाए।।
बोली भी सोम बनी जब मुख, जापे बस राम का नाम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करहू सब कोई ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
सीता राम चरित अति पावन, मधुर सरस और अति मन भावन ।
राम सिया राम सिया राम, जय जय राम।।
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परिचय यह भजन एक भक्त की गहरी आस्था, विनम्रता और पूर्ण समर्पण की भावना को बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण तरीके से व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने प्रभु के सामने अपनी सारी इच्छाओं, अपेक्षाओं और अहंकार को त्यागकर केवल उनकी शरण में आने की प्रार्थना करता है। भजन यह दर्शाता है कि जब जीवन की राहें कठिन और अंधेरी हो जाती हैं, तब प्रभु ही वह दिव्य प्रकाश बनते हैं जो मार्ग दिखाते हैं। इसमें यह भी झलकता है कि सच्ची भक्ति वही है, जहाँ भक्त अपनी इच्छा को प्रभु की इच्छा में विलीन कर देता है और हर परिस्थिति को उनकी कृपा मानकर स्वीकार करता है। भावार्थ इस भजन में भक्त अपने जीवन के संघर्षों, दुखों और भटकावों का उल्लेख करते हुए यह स्वीकार करता है कि हर कठिन समय में प्रभु ने ही उसका साथ दिया है। जब-जब वह रास्ता भटका, प्रभु ने उसे सही दिशा दिखाई और उसके जीवन में आशा का दीप जलाया। संसार की अस्थिरता और अकेलेपन के बीच, वह केवल प्रभु को ही अपना सच्चा सहारा मानता है। अंत में वह पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ अपनी हर इच्छा प्रभु को समर्पित कर देता है और प्रार्थना करता है कि उसका जीवन प्रभु की मर्जी के अनुसार ही चले, क्योंकि वही उसके लिए सर्वोत्तम और कल्याणकारी है।

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