तुम्हरी कृपा - Tumhari Kripa
यह एक अत्यंत भावपूर्ण और विनम्र भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए हनुमान जी से कृपा की याचना करता है। इस भजन में यह विश्वास प्रकट किया गया है कि बिना बजरंगबली की कृपा के श्रीराम तक पहुँचना संभव नहीं है।
जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी, रामजी हमको कैसे मिलेंगे।
जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी, रामजी हमको कैसे मिलेंगे।।
तुम सिया रामजी के प्यारे हो, मैया अंजनी के जाए हो।
अपनी करुणा की कोर करो, हम द्वार पड़े बजरंग बली।।
जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी, रामजी हमको कैसे मिलेंगे।
जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी, रामजी हमको कैसे मिलेंगे।।
तुम भक्तन के रखवारे हो, हम जैसों के आप सहारे हो।
अपनी करुणा की कोर करो, हम द्वार पड़े बजरंग बली।।
जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी, रामजी हमको कैसे मिलेंगे।
जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी, रामजी हमको कैसे मिलेंगे।।
तुम एक अर्ज सुनो बाबा मेरी, कभी छोड़ के हमको न जाओगे।
हम द्वार पड़े बजरंग बली, जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी।।
रामजी हमको कैसे मिलेंगे, जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी।
रामजी हमको कैसे मिलेंगे।।
तुम अजर अमर हो पवनपुत्र, मैं बार-बार बलिहारी जाऊँ।
हम द्वार पड़े बजरंग बली, जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी।।
रामजी हमको कैसे मिलेंगे, जब तक तुम्हरी कृपा नहीं होगी।
रामजी हमको कैसे मिलेंगे।।
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परिचय यह भजन भगवान हनुमान जी की महिमा, उनकी राम-भक्ति और उनके अद्भुत पराक्रम का गुणगान करता है। इसमें हनुमान जी को संकटमोचन और भक्तों के कष्ट हरने वाले के रूप में स्मरण किया गया है। यह भजन श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। भावार्थ भजन में यह बताया गया है कि हनुमान जी सदैव राम-नाम में लीन रहते हैं और अपने भक्तों की हर समस्या को दूर करते हैं। राम-नाम की महिमा इतनी महान है कि उसमें पूरे संसार का सार समाया हुआ है। यह भजन सिखाता है कि जो भी सच्चे मन से हनुमान जी और राम-नाम का स्मरण करता है, उसके जीवन की सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं।

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